नात लिरिक्स

Kya Bayan Ho Shaan-o-Azmat Khwaja-e-Ajmer Ki

क्या बयाँ हो शान-ओ-अज़मत ख़्वाजा-ए-अजमेर की

नात ख़्वान: मीलाद रज़ा अत्तारीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

क्या बयाँ हो शान-ओ-'अज़मत ख़्वाजा-ए-अजमेर कीचार-सू बजती है नौबत ख़्वाजा-ए-अजमेर की

मुद्दतों से आरज़ू पाले हुए हैं दिल में हमकाश ! हो जाए ज़ियारत ख़्वाजा-ए-अजमेर की

उस पे रब की रहमतों का होता रहता है नुज़ूलजिस के दिल में है मोहब्बत ख़्वाजा-ए-अजमेर की

आ'ला हज़रत ने भरी है सुन्नियों के क़ल्ब मेंकैसे कम होगी 'अक़ीदत ख़्वाजा-ए-अजमेर की

सिर्फ़ दुनिया ही नहीं, शारिक़ को रोज़-ए-हश्र भीसुर्ख़-रू रक्खेगी निस्बत ख़्वाजा-ए-अजमेर की

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