नात लिरिक्स

Tumhare Rukh Par Jami Hain Aankhen Main Kaise Rukh Se Hataun Akhiyan

तुम्हारे रुख़ पर जमी हैं आँखें मैं कैसे रुख़ से हटाऊँ अखियाँ

नात ख़्वान: अहमद अली हाकिमशायर: अहमद अली हाकिमउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

तुम्हारे रुख़ पर जमी हैं आँखें, मैं कैसे रुख़ से हटाऊँ अखियाँक़सम ख़ुदा की बड़े हसीं हो, मैं कैसे आख़िर मिलाऊँ अखियाँ

नमाज़ पढ़ने को मैं था आया, तुम्हें जो देखा तो पढ़ ली मैं नेतुम्हारी सूरत है मेरे आगे, मैं कैसे अपनी झुकाऊँ अखियाँ

जिधर भी जाऊँ, जिधर भी देखूँ, तुम्हारे चर्चे, तुम्हारे जल्वेतुम्हीं बसे हो मेरी नज़र में, किसी को क्यूँ मैं दिखाऊँ अखियाँ

ये बात, हाकिम ! मैं सोचता हूँ कि ख़ुद मुसव्विर ने पूछा होगामैं नक़्श तेरे बना रहा हूँ, बताओ कैसी बनाऊँ अखियाँ

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