नात लिरिक्स

Mere Aaqa Aao Ke Muddat Hui Hai

मेरे आक़ा आओ कि मुद्दत हुई है

नात ख़्वान: शाहबाज़ क़मर फ़रीदीशायर: अहमद अली हाकिमउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मेरे आक़ा ! आओ कि मुद्दत हुई हैतेरी राह में अखियाँ बिछाते बिछातेतेरी हसरतों में, तेरी चाहतों मेंबड़े दिन हुए घर सजाते सजाते

मेरा है ये ईमाँ, ये मेरा यक़ीं हैमेरे मुस्तफ़ा सा न कोई हसीं हैकि रुख़ उन का देखा है जब से क़मर नेनिकलता है मुँह को छुपाते छुपाते

मेरे लब पे, मौला ! न कोई सदा हैफ़क़त मुझ निकम्मे की ये ही दु'आ हैमेरी साँस निकले दर-ए-मुस्तफ़ा पेग़म-ए-दिल नबी को सुनाते सुनाते

ये दिल जब से 'इश्क़-ए-नबी में पड़ा हैन दिन की ख़बर है, न शब का पता हैकि अब तो बसारत भी कम हो गई हैतेरे ग़म में आँसू बहाते बहाते

क़यामत का मंज़र बड़ा पुर-ख़तर हैमगर मुस्तफ़ा का जो दीवाना होगावो पुल से गुज़र जाएगा वज्द करतेये ना'रा नबी का लगाते लगाते

ये माना कि इक दिन आनी क़ज़ा हैमगर, दोस्तो ! तुम से ये इल्तिजा हैकि शहर-ए-मुहम्मद की हर इक गली सेजनाज़ा उठाना घुमाते घुमाते

है का'बे की 'अज़मत भी अपनी जगह परमगर दिल में, हाकिम ! तमन्ना यही हैजो मिल जाए नक़्श-ए-कफ़-ए-पा-ए-अहमदतो मर जाऊँ सर को झुकाते झुकाते

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