नात लिरिक्स

Tere Darbar Mein Ashraf Tera Deewana Aata Hai

तेरे दरबार में अशरफ़ तेरा दीवाना आता है

नात ख़्वान: ज़ोहैब अशरफ़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सरवरा शाहा करीमा दस्तगीरा अशरफ़ाहुर्मत-ए-रूह-ए-पयम्बर यक नज़र कुन सू-ए-मा

तेरे दरबार में, अशरफ़ ! तेरा दीवाना आता हैतेरे दरबार में, मुर्शिद ! तेरा दीवाना आता हैकिनारा कर के दुनिया से सू-ए-जानाना आता हैनज़र नीची किए, ले कर दिल-ए-वीराना आता हैअलग ही मस्तियों में मस्त इक मस्ताना आता हैनिहायत 'आक़िबत-अंदेश इक फ़रज़ाना आता है

तेरे दरबार में, अशरफ़ ! तेरा दीवाना आता हैतेरे दरबार में, मुर्शिद ! तेरा दीवाना आता है

ख़िरद की बात करते हो, ख़िरद का मुँह हुआ कालाये अहल-ए-दिल की महफ़िल है, यहाँ आता है दिल वालायहाँ बंदिश नहीं लगती, यहाँ लगता नहीं तालामक़ाम-ए-'इश्क़ है क़ानून की ज़द से बहुत बालायहाँ हर आने वाला 'अक़्ल से बेगाना आता है

तेरे दरबार में, अशरफ़ ! तेरा दीवाना आता हैतेरे दरबार में, मुर्शिद ! तेरा दीवाना आता है

कहीं से तालिब-ओ-मतलूब की क्या दास्ताँ कहिएकोई ये कहता है कुछ कहना है तो एक जाँ कहिएमगर दिल कहता है, कैसे कुछ इन के दरमियाँ कहिए !दिल-ओ-दिलदार में किस को मकीं किस को मकाँ कहिए ?कि जो जिस की तरफ़ आता है बे-बाकाना आता है

तेरे दरबार में, अशरफ़ ! तेरा दीवाना आता हैतेरे दरबार में, मुर्शिद ! तेरा दीवाना आता है

अदब के साथ नंगे पाँव हो के आना आता हैइसी अंदाज़ से चल कर यहाँ हर दाना आता हैमिटा कर अपनी हस्ती को हर इक परवाना आता हैकिसी की जल्वा-गाह-ए-नाज़ का काशाना आता हैवो दीवाना लिए अपना दिल-ए-दीवाना आता है

तेरे दरबार में, अशरफ़ ! तेरा दीवाना आता हैतेरे दरबार में, मुर्शिद ! तेरा दीवाना आता है

जो तेरा है, वुजूद अपना उसे मनवाना आता हैउसे अपने अलग अंदाज़ में ही आना आता हैजो तेरा हो गया उस को कहाँ डर जाना आता हैसुरूर-ए-बार काँधों पर लिए मय-ख़ाना आता हैतेरा बेबाक महशर में भी बे-बाकाना आता है

तेरे दरबार में, अशरफ़ ! तेरा दीवाना आता हैतेरे दरबार में, मुर्शिद ! तेरा दीवाना आता है

जवाब आख़िर कहाँ से लाओगे उस के क़रीने कावही हर रुख़ से लाइक़ है बक़ा के इस ख़ज़ीने कावही हक़दार था, हक़दार है ये जाम पीने काशहीद-ए-राह-ए-तस्लीम-ओ-रज़ा को हक़ है जीने काकि वो हरगिज़ नहीं मरते जिन्हें मर जाना आता है

तेरे दरबार में, अशरफ़ ! तेरा दीवाना आता हैतेरे दरबार में, मुर्शिद ! तेरा दीवाना आता है

लिए जामी को अपने साथ फ़ेहरिस्त-ए-मुहिब्बाँ मेंचलो आ जाओ अहल-ए-बैत के नूरी शबिस्ताँ मेंसुवागत है तुम्हारा फ़ातिमा के इस गुलिस्ताँ मेंखड़े हो जाओ, सय्यद ! बारगाह-ए-शाह-ए-सिमनाँ मेंतेरी मक़बूलियत का तोहफ़ा-ए-शाहाना आता है

तेरे दरबार में, अशरफ़ ! तेरा दीवाना आता हैतेरे दरबार में, मुर्शिद ! तेरा दीवाना आता है

सरवरा शाहा करीमा दस्तगीरा अशरफ़ाहुर्मत-ए-रूह-ए-पयम्बर यक नज़र कुन सू-ए-मा

कलाम:सय्यिद मुहम्मद अशरफ़ अशरफ़ी जीलानी(मुहद्दिस-ए-आ'ज़म-ए-हिन्द)

तज़मीन:सय्यिद जामी अशरफ़

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