नात लिरिक्स

Tere Dar Ki Ho Khair, Shah-e-Ajmer | Kar Do Karam, More Khwaja

तेरे दर की हो ख़ैर, शह-ए-अजमेर | कर दो करम, मोरे ख़्वाजा

नात ख़्वान: मसूद मेहदी क़ादरी मिस्बाहीशायर: अल्लामा सलमान फ़रीदी मिस्बाहीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

कर दो करम, मोरे ख़्वाजा !कर दो करम, मोरे ख़्वाजा !

तेरे दर की हो ख़ैर, शह-ए-अजमेर !मिटे ग़म की अँधेर, शह-ए-अजमेर !

कर दो करम, मोरे ख़्वाजा !कर दो करम, मोरे ख़्वाजा !

फ़रियाद सुनो मोरे नैनन कीकहती है लड़ी ये अँसुवन कीचलती है कटारी दुश्मन कीकर दो उन्हें ज़ेर, शह-ए-अजमेर !

कर दो करम, मोरे ख़्वाजा !कर दो करम, मोरे ख़्वाजा !

ए रब के वली प्यारे ख़्वाजा !भारत की ज़मीं के महाराजा !मुश्किल में हैं अब तेरे शैदाहै ज़ुल्म घनेर, शह-ए-अजमेर !

कर दो करम, मोरे ख़्वाजा !कर दो करम, मोरे ख़्वाजा !

नफ़रत की नज़र, उल्टी बोलीइस बाग़ में ज़ाग़ की है टोलीबुनियाद मोहब्बत की डोलीआपस में है बैर, शह-ए-अजमेर !

कर दो करम, मोरे ख़्वाजा !कर दो करम, मोरे ख़्वाजा !

गिरती हुई आस सँभल जाएमज़लूम का हाल बदल जाएतुम चाहो तो आज ही टल जाएदुख-दर्द का फेर, शह-ए-अजमेर !

कर दो करम, मोरे ख़्वाजा !कर दो करम, मोरे ख़्वाजा !

सख़ियों के सख़ी ! ए ग़रीब-नवाज़ !ए चर्ख़-ए-विलायत के शहबाज़ !सुन लीजे फ़रीदी की आवाज़हम सब हों ब-ख़ैर, शह-ए-अजमेर !

कर दो करम, मोरे ख़्वाजा !कर दो करम, मोरे ख़्वाजा !

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