सत-रंगी फूलों के गुलशन, ए मेरे वतन ! महबूब वतन !बे-दाग़ रहे तेरा दामन, ए मेरे वतन ! महबूब वतन !
सत-रंगी फूलों के गुलशन, ए मेरे वतन ! महबूब वतन !
तू 'इल्म-ओ-हुनर का मरकज़ है, तू 'अक़्ल-ओ-ख़िरद का मेहवर हैतू अहल-ए-वतन की है जन्नत, तू हुस्न-ओ-'इश्क़ का साग़र हैबा-फ़ैज़ हैं तेरे दश्त-ओ-दमन, ए मेरे वतन ! महबूब वतन !
सत-रंगी फूलों के गुलशन, ए मेरे वतन ! महबूब वतन !
जाने कितनी नज़रें उट्ठीं तेरी नौ-ख़ेज़ बहारों परअँधियारों ने भी दस्तक दी तेरे फ़िरदौसी उजियारों परहै सुब्ह तेरी फिर भी रौशन, ए मेरे वतन ! महबूब वतन !
सत-रंगी फूलों के गुलशन, ए मेरे वतन ! महबूब वतन !
ये इन्द्र-धनुष प्यारे प्यारे क्या दिलकश धूप खिलाते हैंजल-थल, नदियों के गहवारे, तारों को झूला झुलाते हैंजगमग जगमग तेरा दर्पन, ए मेरे वतन ! महबूब वतन !
सत-रंगी फूलों के गुलशन, ए मेरे वतन ! महबूब वतन !
तेरी ख़ातिर दीवानों ने, अलबेलों ने, मस्तानों नेइस मिट्टी पर क़ुर्बान किया है ख़ुद को वीर जवानों नेशादाब रहेगा तेरा चमन, ए मेरे वतन ! महबूब वतन !
सत-रंगी फूलों के गुलशन, ए मेरे वतन ! महबूब वतन !
मेहदी ! वो हिमालय की चोटी अपनी है मुहाफ़िज़ बरसों सेअल्लाह बचाए रखे इसे दुनिया की ज़ालिम नज़रों सेदे तुझ को सलामी नील-गगन, ए मेरे वतन ! महबूब वतन !
सत-रंगी फूलों के गुलशन, ए मेरे वतन ! महबूब वतन !
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