नात लिरिक्स

Tayba Ke Jaane Waale ! Jaa Kar Bade Adab Se

तयबा के जाने वाले ! जा कर बड़े अदब से

नात ख़्वान: मुहम्मद ओवैस रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

तयबा के जाने वाले ! जा कर बड़े अदब सेमेरा भी क़िस्सा-ए-ग़म कहना शह-ए-'अरब से

कहना कि, शाह-ए-'आली ! इक रंज-ओ-ग़म का मारादोनों जहाँ में इस का हैं आप ही सहारा

हालात-ए-पुर-अलम से हर दम गुज़र रहा हैऔर काँपते लबों से फ़रियाद कर रहा है

बार-ए-गुनाह अपना है दोश पर उठाएकोई नहीं है ऐसा जो पूछने को आए

भटका हुआ मुसाफ़िर मंज़िल को ढूँडता हैतारीकियों में माह-ए-कामिल को ढूँडता है

सीने में है अँधेरा, दिल है सियाह-ख़ानाये सब मेरी हक़ीक़त सरकार को सुनाना

कहना मेरे नबी से, महरूम हूँ ख़ुशी सेसर पर इक अब्र-ए-ग़म है, अश्क़ों से आँख नम हैपामाल-ए-ज़िंदगी हूँ, सरकार ! उम्मती हूँउम्मत के रहनुमा हो, कुछ 'अर्ज़-ए-हाल सुन लो

फ़रियाद कर रहा हूँ, मैं दिल-फ़िगार कब सेमेरा भी क़िस्सा-ए-ग़म कहना शह-ए-'अरब से

तयबा के जाने वाले ! जा कर बड़े अदब सेमेरा भी क़िस्सा-ए-ग़म कहना शह-ए-'अरब से

कहना कि खा रहा हूँ मैं ठोकरें जहाँ मेंतुम ही बताओ, आक़ा ! जाऊँ भला कहाँ मैं

महसूस कर रहा हूँ, दुनिया है एक धोकामतलब के यार हैं सब, कोई नहीं किसी का

किस को मैं अपना जानूँ, किस का मैं लूँ सहारामुझ को तो, मेरे आक़ा ! है आप का सहारा

तुम ही सुनोगे मेरी, तुम ही करम करोगेदोनों जहाँ में तुम ही मेरा भरम रखोगे

तुम दाद-ख़्वाह-ए-'आलम, मैं इक नसीब-ए-बरहमतुम बे-कसों के वाली, मैं बे-नवा सवाली

तुम 'आसियों का यारा, मैं गर्दिशों का मारारहमत हो तुम सरापा, मैं मुर्तक़िब ख़ता का

हूँ शर्मसार अपने आ'माल के सबब सेमेरा भी क़िस्सा-ए-ग़म कहना शह-ए-'अरब से

तयबा के जाने वाले ! जा कर बड़े अदब सेमेरा भी क़िस्सा-ए-ग़म कहना शह-ए-'अरब से

ऐ 'आज़ीम-ए-मदीना ! जा कर नबी से कहनासोज़-ए-ग़म-ए-अलम से अब जल रहा है सीना

कहना के दिल में लाखों अरमाँ भरे हुए हैंकहना के हसरतों के नश्तर चुभे हुए हैं

है आरज़ू ये दिल की, मैं भी मदीने जाऊँसुल्तान-ए-दो-जहाँ को सब दाग़-ए-दिल दिखाऊँ

काटूँ हज़ार चक्कर तयबा की हर गली केयूँही गुज़ार दूँ मैं अय्याम ज़िंदगी के

फूलों पे जाँ निसारूँ, काटों पे दिल को वारूँज़र्रों को दूँ सलामी, दर की करूँ ग़ुलामी

दीवार-ओ-दर को चूमूँ, क़दमों पे सर को रख दूँमहबूब से लिपट कर, रोता रहूँ बराबर

'आलम के दिल में है ये हसरत न जाने कब सेमेरा भी क़िस्सा-ए-ग़म कहना शह-ए-'अरब से

तयबा के जाने वाले ! जा कर बड़े अदब सेमेरा भी क़िस्सा-ए-ग़म कहना शह-ए-'अरब से

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