नात लिरिक्स

Rok Leti Hai Aap Ki Nisbat, Teer Jitne Bhi Ham Pe Chalte Hain

रोक लेती है आप की निस्बत, तीर जितने भी हम पे चलते हैं

नात ख़्वान: मुहम्मद ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: ख़ालिद महमूद ख़ालिदउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

रोक लेती है आप की निस्बततीर जितने भी हम पे चलते हैंये करम है हुज़ूर का हम परआने वाले अज़ाब टलते हैं

वोही भरते हैं झोलियाँ सब कीवो समझते हैं बोलियाँ सब कीआओ, बाज़ार-ए-मुस्तफ़ा को चलेंखोटे सिक्के वहीं पे चलते हैं

अपनी औक़ात सिर्फ़ इतनी हैकुछ नहीं, बात सिर्फ़ इतनी हैकल भी टुकड़ों पे उन के पलते थेअब भी टुकड़ों पे उन के पलते हैं

अब हमें क्या कोई गिराएगाहर सहारा गले लगाएगाहम ने ख़ुद को गिरा दिया है वहाँगिरने वाले जहाँ सँभलते हैं

घर वोही मुश्कबार होते हैंख़ुल्द से हमकिनार होते हैंज़िक्र-ए-सरकार के हवालों सेजिन घरों में चराग़ जलते हैं

दिल की हसरत वो पूरी फ़रमाएँइस तरह तयबा मुझ को बुलवाएँमेरे मुर्शिद ये मुझ से फ़रमाएँआओ, तयबा नगर को चलते हैं

ज़िक्र-ए-सरकार के उजालों कीबे-निहायत हैं रिफ़'अतें, ख़ालिद !ये उजाले कभी न सिमटेंगेये वो सूरज नहीं जो ढलते हैं

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