नात लिरिक्स

Samaa Hai Noor Ka NIkla Chaand Hai

समाँ है नूर का निकला चाँद है

नात ख़्वान: मुहम्मद ओवैस रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

समाँ है नूर का, निकला चाँद हैसमाँ है नूर का, निकला चाँद है

निकला चाँद है, निकला चाँद हैनिकला चाँद है, निकला चाँद है

समाँ है नूर का, निकला चाँद हैसमाँ है नूर का, निकला चाँद हैआसमाँँ पर हर नज़र है, कैसा निकला चाँद है'ईद-ए-मीलाद-ए-मुहम्मद-मुस्तफ़ा का चाँद है

निकला चाँद है, निकला चाँद हैनिकला चाँद है, निकला चाँद है

सरकार की आमद ! मरहबा !दिलदार की आमद ! मरहबा !मंठार की आमद ! मरहबा !हुज़ूर की आमद ! मरहबा !पुर-नूर की आमद ! मरहबा !ज़रा झूम के बोलो ! मरहबा !लब चूम के बोलो ! मरहबा !परचम लहरा कर बोलो ! मरहबा !मरहबा ! मरहबा !

समाँ है नूर का, निकला चाँद हैसमाँ है नूर का, निकला चाँद है

ज़ुल्मत-ए-कुफ़्र-ओ-ज़लालत का है सीना चाक-चाकतीरगी-ए-दहर में निकला ख़ुदा का चाँद है

समाँ है नूर का, निकला चाँद हैसमाँ है नूर का, निकला चाँद है

निकला चाँद है, निकला चाँद हैनिकला चाँद है, निकला चाँद है

समाँ है नूर का, निकला चाँद हैसमाँ है नूर का, निकला चाँद है

कह दो, दामन को समेटे, कुफ़्र की तारीकियाँआमिना बीबी के घर निकला ख़ुदा का चाँद है

समाँ है नूर का, निकला चाँद हैसमाँ है नूर का, निकला चाँद है

निकला चाँद है, निकला चाँद हैनिकला चाँद है, निकला चाँद है

समाँ है नूर का, निकला चाँद हैसमाँ है नूर का, निकला चाँद है

सरकार की आमद ! मरहबा !दिलदार की आमद ! मरहबा !मंठार की आमद ! मरहबा !हुज़ूर की आमद ! मरहबा !पुर-नूर की आमद ! मरहबा !ज़रा झूम के बोलो ! मरहबा !लब चूम के बोलो ! मरहबा !परचम लहरा कर बोलो ! मरहबा !मरहबा ! मरहबा !

समाँ है नूर का, निकला चाँद हैसमाँ है नूर का, निकला चाँद है

इक तरफ़ था बद्र-ए-कामिल, इक तरफ़ तयबा का चाँद'इश्क़-ए-जाबिर ने कहा, तयबा का सुथरा चाँद है

समाँ है नूर का, निकला चाँद हैसमाँ है नूर का, निकला चाँद है

निकला चाँद है, निकला चाँद हैनिकला चाँद है, निकला चाँद है

समाँ है नूर का, निकला चाँद हैसमाँ है नूर का, निकला चाँद है

ख़ाना-ए-तारीक में जब मुस्कुराया आप नेआइशा ख़ातून ने समझा कि निकला चाँद है

समाँ है नूर का, निकला चाँद हैसमाँ है नूर का, निकला चाँद है

निकला चाँद है, निकला चाँद हैनिकला चाँद है, निकला चाँद है

समाँ है नूर का, निकला चाँद हैसमाँ है नूर का, निकला चाँद है

हर तरफ़ है 'ईद का मंज़र, ए रज़वी ! ज़िंदाबादबारहवीं की सुब्ह निकला आमिना का चाँद है

समाँ है नूर का, निकला चाँद हैसमाँ है नूर का, निकला चाँद है

निकला चाँद है, निकला चाँद हैनिकला चाँद है, निकला चाँद है

समाँ है नूर का, निकला चाँद हैसमाँ है नूर का, निकला चाँद है

सरकार की आमद ! मरहबा !दिलदार की आमद ! मरहबा !मंठार की आमद ! मरहबा !हुज़ूर की आमद ! मरहबा !पुर-नूर की आमद ! मरहबा !ज़रा झूम के बोलो ! मरहबा !लब चूम के बोलो ! मरहबा !परचम लहरा कर बोलो ! मरहबा !मरहबा ! मरहबा !

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