नात लिरिक्स

Tadap Uthta Hai Dil Lafzon Mein Dohrai Nahin Jaati

तड़प उठता है दिल लफ़्ज़ों में दोहराई नहीं जाती

नात ख़्वान: मुहम्मद अली फ़ैज़ीशायर: पीर नसीरुद्दीन नसीरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

तड़प उठता है दिल, लफ़्ज़ों में दोहराई नहीं जातीज़बाँ पर कर्बला की दास्ताँ लाई नहीं जाती

हुसैन इब्न-ए-'अली के ग़म में हूँ दुनिया से बेगानाहुजूम-ए-ख़ल्क़ में भी मेरी तन्हाई नहीं जाती

उदासी छा रही है रूह पर शाम-ए-ग़रीबाँ कीतबी'अत है कि बहलाने से बहलाई नहीं जाती

कहा 'अब्बास ने, अफ़सोस बाज़ू कट गए मेरेसकीना तक ये मश्क-ए-आब ले जाई नहीं जाती

सुना है कर्बला की ख़ाक है इक्सीर से बढ़ करये मिट्टी आँख में लेने से बीनाई नहीं जाती

जतन हर दौर में क्या क्या न अहल-ए-शर ने कर देखेमगर ज़हरा के प्यारों की पज़ीराई नहीं जाती

दलील इस से हो बढ़ कर क्या शहीदों की तहारत परकि मय्यत दफ़्न की जाती है, नहलाई नहीं जाती

तमाँचे मार लो, ख़ैमे जला लो, क़ैद में रख लो'अली के गुल-रुख़ों से बू-ए-ज़हराई नहीं जाती

कहा शब्बीर ने, 'अब्बास ! तुम मुझ को सहारा दोकि तन्हा लाश-ए-अकबर मुझ से दफ़नाई नहीं जाती

हुसैनिय्यत को पाना है तो टक्कर ले यज़ीदों सेये वो मंज़िल है जो लफ़्ज़ों में समझाई नहीं जाती

वो जिन चेहरों को ज़ीनत ग़ाज़ा-ए-ख़ाक-ए-नजफ़ बख़्शेदम-ए-आख़िर भी उन चेहरों की ज़ेबाई नहीं जाती

कोई भी दौर हो, तू ही इमाम-ए-ग़म ठहरता हैग़म-ए-शब्बीर ! तेरी शान-ए-यकताई नहीं जाती

नसीर ! आख़िर 'अदावत के भी कुछ आदाब होते हैंकिसी बीमार को ज़ंजीर पहनाई नहीं जाती

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