सुनानी है तो सुनाओ रसूल की बातेंहसन, हुसैन, अली की, बतूल की बातें
अता करेंगे हमें आज बिन कहे वो हीअयाँ है उन पे हमारे वसूल की बातें
मदीन-ए-पाक में न जा सका वो ख़ुद लेकिनतसव्वुरों में गई है मलूल की बातें
यहाँ पे थाम लो आल-ए-रसूल का दामनयही है दोनों जहाँ में हुसूल की बातें
हर एक ज़र्रे पे करते हैं रश्क क़ुदसी भीअदब से कीजिए उस दर की धूल की बातें
नबी-ए-पाक के सदक़े में फिर से लौटा देवो मदरसे का तकल्लुम, सकूल की बातें
सुना के बू-ए-नबी का बयान कह, बेख़ुद !न ज़िक्र-ए-इत्र पसंद है, न फूल की बातें
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