ख़ुदा के फ़ज़्ल से क्या ख़ुश-नुमा सिब्तैन का सेहरामुबारक हो ! मुबारक की बिना सिब्तैन का सेहरा
शहंशाह-ए-मदीना की ये प्यारी प्यारी सुन्नत हैमहकते फूल के जैसे खिला सिब्तैन का सेहरा
निगाहें हों झुकी, लब पर सजा क़ुफ़्ल-ए-मदीना होसभी कह दें, है देखो बा-हया सिब्तैन का सेहरा
दुआ अकरम की भी शामिल है देखो इस ही सेहरे मेंतभी तो दिल-रुबा और दिल-कुशा सिब्तैन का सेहरा
न क्यूँ फूले समाए आज ये 'फ़र्रुख़ बेग़म' भीदुआ-ए-माँ से ही है पुर-ज़िया सिब्तैन का सेहरा
यही 'तेहसीन' कहते हैं दुआ-ए-नाज़ दे कर केनई मंज़िल की ओर जो चला सिब्तैन का सेहरा
नज़र जो आ रहे हैं वो 'रमीज़' कह रहे हैं सबबहुत से फूल कलियों से बना सिब्तैन का सेहरा
मुबारकबाद दे कर कहते हैं सब को 'फहीम' येजवाँ-बख़्त के सर पर जो बँधा सिब्तैन का सेहरा
ख़ुदा रखे सलामत इस नए जोड़े को उम्र भरउसे जब-जब भी देखो नित नया सिब्तैन का सेहरा
दिखा का'बा इन्हें और दिखा शहर-ए-मदीना भीमसर्रत में मुज़य्यन, ए ख़ुदा ! सिब्तैन का सेहरा
क़लम ने कह दिया मुझ को बहुत सेहरे लिखे तू नेमगर सब सेहरों से, बेख़ुद ! जुदा सिब्तैन का सेहरा
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