नात लिरिक्स

Siyah Zulfen Haseen Aankhen Mere Nabi Ka Jamal Dekho

सियाह ज़ुल्फ़ें हसीन आँखें मेरे नबी का जमाल देखो

नात ख़्वान: अब्दुल बासित हस्सानीशायर: डॉ. शाकिरुल्लाह हमदर्दउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सियाह ज़ुल्फ़ें हसीन आँखें, मेरे नबी का जमाल देखोख़ुदा से मिलते हैं ला-मकाँ पर, जहान वालो ! कमाल देखो

है कौन जल्वा-नुमा 'अरब में कि सारा 'आलम है जगमगायाज़मीं मुनव्वर, फ़ज़ा मु'अत्तर, है बुत-कदों पर ज़वाल आया

अरे मुसलमान ! ग़फ़लतों में हम उन को भूले हुए हैं क्यूँकर ?हमारी बख़्शिश का वो करेंगे ख़ुदा के आगे सवाल देखो

नसीम-ए-सहरी ! मदीने जा कर मेरे नबी को पयाम देनानहीं है ख़ौफ़-ए-ख़ुदा किसी को, है ऐसा उम्मत का हाल देखो

जो आसमाँ पर नज़र उठा कर नबी ने देखा, किया इशारातो शक़ हुआ फिर क़मर फ़लक पर, ये मो'जिज़े की मिसाल देखो

ये ख़्वाब देखा था एक दिन मैं हुज़ूर-ए-अक़्दस के सामने थावहाँ मैं, हमदर्द ! कह रहा था कि अब नहीं कुछ मलाल देखो

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