नात लिरिक्स

Salar-e-Sahaba Wo Pehla Khalifa | Sarkar Ka Pyara Siddiq Hamara | Har Sunni Ka Pyara Siddiq Hamara

सालार-ए-सहाबा वो पहला ख़लीफ़ा | सरकार का प्यारा सिद्दीक़ हमारा | हर सुन्नी का नारा सिद्दीक़ हमारा

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीशायर: अल्लामा निसार अली उजागरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

अना मजनून, मजनून, मजनूनु-सिद्दीक़अना मजनून, मजनून, मजनूनु-सिद्दीक़

परवाने को चराग़ तो बुलबुल को फूल बससिद्दीक़ के लिए है ख़ुदा का रसूल बस

सालार-ए-सहाबा, वो पहला ख़लीफ़ासरकार का प्यारा, सिद्दीक़ हमाराहर सुन्नी का ना'रा, सिद्दीक़ हमारा

मुस्तफ़ा का हम-सफ़र ! अबू-बकर अबू-बकर !गली-गली नगर-नगर ! अबू-बकर अबू-बकर !लुटाया जिस ने अपना घर ! अबू-बकर अबू-बकर !नहीं है जिस को कोई डर ! अबू-बकर अबू-बकर !है चर्चे जिस के 'अर्श पर ! अबू-बकर अबू-बकर !लगेगा नारा फ़र्श पर ! अबू-बकर अबू-बकर !

दुनिया-ए-सदाक़त में तेरा नाम रहेगासिद्दीक़ तेरे नाम से इस्लाम रहेगा

सालार-ए-सहाबा, वो पहला ख़लीफ़ासरकार का प्यारा, सिद्दीक़ हमाराहर सुन्नी का ना'रा, सिद्दीक़ हमारा

हर नस्ल तेरे काम की तजदीद करेगीजब तक रहेगी दुनिया तेरा नाम रहेगा

सालार-ए-सहाबा, वो पहला ख़लीफ़ासरकार का प्यारा, सिद्दीक़ हमाराहर सुन्नी का ना'रा, सिद्दीक़ हमारा

मुस्तफ़ा का हम-सफ़र ! अबू-बकर अबू-बकर !गली-गली नगर-नगर ! अबू-बकर अबू-बकर !लुटाया जिस ने अपना घर ! अबू-बकर अबू-बकर !नहीं है जिस को कोई डर ! अबू-बकर अबू-बकर !है चर्चे जिस के 'अर्श पर ! अबू-बकर अबू-बकर !लगेगा नारा फ़र्श पर ! अबू-बकर अबू-बकर !

सिद्दीक़ के बाग़ी तो सदा रोते रहेंगेख़ुश 'आशिक़-ए-सिद्दीक़ सुब्ह-ओ-शाम रहेगा

सालार-ए-सहाबा, वो पहला ख़लीफ़ासरकार का प्यारा, सिद्दीक़ हमाराहर सुन्नी का ना'रा, सिद्दीक़ हमारा

अना मजनून, मजनून, मजनूनु-सिद्दीक़अना मजनून, मजनून, मजनूनु-सिद्दीक़

बे-लौस मोहब्बत का सिला ख़ूब मिला हैता-हश्र मुहम्मद के संग आराम रहेगा

सालार-ए-सहाबा, वो पहला ख़लीफ़ासरकार का प्यारा, सिद्दीक़ हमाराहर सुन्नी का ना'रा, सिद्दीक़ हमारा

ये फ़ैसला है अपना, यही बात है आख़िरहै ख़त्म-ए-नबुव्वत के लिए जान भी हाज़िर

सिद्दीक़ की तलवार ने कज़्ज़ाब को मारायूँ ख़त्म-ए-नबुव्वत पे कड़ा पहरा लगाया

सिद्दीक़ के गुस्ताख़ से तो जंग रहेगीजो उन से जलेगा वही नाकाम रहेगा

सालार-ए-सहाबा, वो पहला ख़लीफ़ासरकार का प्यारा, सिद्दीक़ हमाराहर सुन्नी का ना'रा, सिद्दीक़ हमारा

मुस्तफ़ा का हम-सफ़र ! अबू-बकर अबू-बकर !गली-गली नगर-नगर ! अबू-बकर अबू-बकर !लुटाया जिस ने अपना घर ! अबू-बकर अबू-बकर !नहीं है जिस को कोई डर ! अबू-बकर अबू-बकर !है चर्चे जिस के 'अर्श पर ! अबू-बकर अबू-बकर !लगेगा नारा फ़र्श पर ! अबू-बकर अबू-बकर !

सिद्दीक़ की बै'अत जो की हसनैन-ओ-'अली नेतारीख़ी फ़ैसला तो सर-ए-'आम रहेगा

सालार-ए-सहाबा, वो पहला ख़लीफ़ासरकार का प्यारा, सिद्दीक़ हमाराहर सुन्नी का ना'रा, सिद्दीक़ हमारा

असहाब-ए-नबी, आल-ए-नबी दीन की पहचानजो दिल का है अँधा वही गुमनाम रहेगा

सालार-ए-सहाबा, वो पहला ख़लीफ़ासरकार का प्यारा, सिद्दीक़ हमाराहर सुन्नी का ना'रा, सिद्दीक़ हमारा

हर 'अहद पे सिद्दीक़ का एहसान, उजागर !बा'द-अज़-नबी सिद्दीक़ का इकराम रहेगा

सालार-ए-सहाबा, वो पहला ख़लीफ़ासरकार का प्यारा, सिद्दीक़ हमाराहर सुन्नी का ना'रा, सिद्दीक़ हमारा

परवाने को चराग़ तो बुलबुल को फूल बससिद्दीक़ के लिए है ख़ुदा का रसूल बस

मुस्तफ़ा का हम-सफ़र ! अबू-बकर अबू-बकर !गली-गली नगर-नगर ! अबू-बकर अबू-बकर !लुटाया जिस ने अपना घर ! अबू-बकर अबू-बकर !नहीं है जिस को कोई डर ! अबू-बकर अबू-बकर !है चर्चे जिस के 'अर्श पर ! अबू-बकर अबू-बकर !लगेगा नारा फ़र्श पर ! अबू-बकर अबू-बकर !

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।