नात लिरिक्स

Saba ! Mujh Ko Le Chal Dayaae-e-Madina

सबा ! मुझ को ले चल दयार-ए-मदीना

नात ख़्वान: उस्मान रज़ा हारूनीशायर: उस्मान रज़ा हारूनीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सबा ! मुझ को ले चल दयार-ए-मदीनाचले न चले कोई, मैं तो चलूँगाबड़ा दिल-नशीं है मदीने का मंज़रकहे न कहे कोई, मैं तो कहूँगा

वो तयबा का मंज़र सुहानाजहाँ सर झुकाए ज़मानाजहाँ पर फ़रिश्तों की पेशानी ख़म हैवही पर अदा मैं भी सज्दा करूँगा

वो महशर का दिन, सख़्त गर्मीजहाँ हर क़दम नफ़्सी नफ़्सीपकड़ पाएँगे क्या मुझे वो फ़रिश्तेमैं आक़ा के दामन में जा कर छुपूँगा

चला क़ाफ़िला जब मदीनेतो रो कर कहा ये किसी नेअरे जाने वालो ! मुझे साथ ले लोचले न चले कोई, मैं तो चलूँगा

वो महशर में पहचान लेंगेये 'उस्मान है, जान लेंगेदुरूद-ओ-सलामों की बौछार होगीवहाँ जब मैं ना'त-ए-शह-ए-दीं पढ़ूँगा

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।