नात लिरिक्स

Ruk Gai Hai Zameen Ruk Gaya Aasman | Aaj Pyare Muhammad Ki Meraj Hai | Lakhon Durood Aur Lakhon Salam

रुक गई है ज़मीं रुक गया आसमाँ | आज प्यारे मुहम्मद की मेराज है | लाखों दुरूद और लाखों सलाम

नात ख़्वान: ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

लाखों दुरूद और लाखों सलामलाखों दुरूद और लाखों सलाम

शब-ए-असरा के दूल्हा पे दाइम दुरूदनौशा-ए-बज़्म-ए-जन्नत पे लाखों सलाम

रुक गई है ज़मीं, रुक गया आसमाँआज प्यारे मुहम्मद की मे'राज हैहुक्म-ए-रब्बुल-'उला से सजे दो जहाँआज प्यारे मुहम्मद की मे'राज है

रुक गई है ज़मीं, रुक गया आसमाँआज प्यारे मुहम्मद की मे'राज है

मे'राज-ए-नबी सुब्हानल्लाह !मे'राज-ए-नबी सुब्हानल्लाह !

आए जिब्रील जब सू-ए-ख़ैर-उल-वराचूमते हैं अदब से पा-ए-मुस्तफ़ाबा'द-ए-तस्लीम कहती है उन की ज़ुबाँआज प्यारे मुहम्मद की मे'राज है

रुक गई है ज़मीं, रुक गया आसमाँआज प्यारे मुहम्मद की मे'राज है

मे'राज-ए-नबी सुब्हानल्लाह !मे'राज-ए-नबी सुब्हानल्लाह !

सब से पहले गए का'बा-ए-नूर परबैत-ए-अक़्दस पे फिर बैत-ए-मा'मूर परसिदरतुल-मुंतहा से गए ला-मकाँआज प्यारे मुहम्मद की मे'राज है

रुक गई है ज़मीं, रुक गया आसमाँआज प्यारे मुहम्मद की मे'राज है

मे'राज-ए-नबी सुब्हानल्लाह !मे'राज-ए-नबी सुब्हानल्लाह !

उठ गए दरमियाँ जो हिजाबात थेरब त'आला से महव-ए-मुलाक़ात थेज़ात-ए-रब्बुल-'उला आप पर है अयाँआज प्यारे मुहम्मद की मे'राज है

रुक गई है ज़मीं, रुक गया आसमाँआज प्यारे मुहम्मद की मे'राज है

मे'राज-ए-नबी सुब्हानल्लाह !मे'राज-ए-नबी सुब्हानल्लाह !

वज्ह-ए-तख़्लीक़-ए-'आलम है जिन का वजूदशब-ए-असरा के दूल्हा पे दाइम दुरूदज़ात-ए-रब्बुल-'उला के हुए राज़-दाँआज प्यारे मुहम्मद की मे'राज है

रुक गई है ज़मीं, रुक गया आसमाँआज प्यारे मुहम्मद की मे'राज है

मे'राज-ए-नबी सुब्हानल्लाह !मे'राज-ए-नबी सुब्हानल्लाह !

'अर्ज़ की, मेरी उम्मत ख़ता-कार हैहाँ मगर तू, ख़ुदा ! रब्ब-ए-ग़फ़्फ़ार हैरब ने कर दी 'अता ख़ुल्द की चाबियाँआज प्यारे मुहम्मद की मे'राज है

रुक गई है ज़मीं, रुक गया आसमाँआज प्यारे मुहम्मद की मे'राज है

मे'राज-ए-नबी सुब्हानल्लाह !मे'राज-ए-नबी सुब्हानल्लाह !

ये न पूछो कि तोहफ़े में क्या क्या दियापहले उम्मत की बख़्शिश का वा'दा लियाहै मुहिब अपने महबूब पर मेहरबाँआज प्यारे मुहम्मद की मे'राज है

रुक गई है ज़मीं, रुक गया आसमाँआज प्यारे मुहम्मद की मे'राज है

मे'राज-ए-नबी सुब्हानल्लाह !मे'राज-ए-नबी सुब्हानल्लाह !

सब से अफ़ज़ल वो तोहफ़ा मिला आज हैपंजगाना जो मोमिन की मे'राज हैबस कहूँ झूम कर, साबिर-ए-बेनिशाँ !आज प्यारे मुहम्मद की मे'राज है

रुक गई है ज़मीं, रुक गया आसमाँआज प्यारे मुहम्मद की मे'राज है

मे'राज-ए-नबी सुब्हानल्लाह !मे'राज-ए-नबी सुब्हानल्लाह !

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।