नात लिरिक्स

Roz Bechain Karta Hi Hai Dil Kisi Na Kisi Ke Liye | Samne Seerat-e-Mustafa Dars Hai Rahbari Ke Liye With Tazmeen

रोज़ बेचैन करता ही है दिल किसी न किसी के लिए | सामने सीरत-ए-मुस्तफ़ा दर्स है रहबरी के लिए तज़मीन के साथ

नात ख़्वान: गुलफ़ाम रज़ा हस्सानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

रोज़ बेचैन करता ही है दिल किसी न किसी के लिएजाम-ए-'इश्क़-ए-नबी पी जिए क़ल्ब की ताज़गी के लिए'उम्र हरगिज़ नहीं, दोस्तो ! नफ़्स की पैरवी के लिएसामने सीरत-ए-मुस्तफ़ा दर्स है रहबरी के लिएफिर हमें और क्या चाहिए, दोस्तो ! ज़िंदगी के लिए

जब तलक जिस्म में जान है, चल रहा फिर रहा है बशरसूखना है मगर एक दिन शादमाँ ज़िंदगी का शजररो रहा होगा आ'माल पर, कुछ न आएगा तुझ को नज़रकर यक़ीं तू मेरी बात पर, कैसा होगा अँधेरा वो घरआ ही जाएँगे ख़ैर-उल-बशर, क़ब्र में रौशनी के लिए

पहुँचे जिन के क़दम फ़र्श से 'अर्श और 'अर्श से ला-मकाँहै उन्हीं के तसद्दुक़ रवाँ अपने जीवन का ये कारवाँआज दुनिया है आबाद है अपने सपनों का ये आशियाँहश्र में हम कहाँ तुम कहाँ, जब न होगा कोई मेहरबाँबन के रहमत हुज़ूर आएँगे, अपने हर उम्मती के लिए

काम ऐसे करो सब कहें, आफ़रीं आफ़रीं आफ़रींचखना है मौत का तो मज़ा लाज़मी लाज़मी लाज़मीबात इक और कर लीजिए, ख़ूब अच्छी तरह दिल-नशींहाथ आने को कुछ भी नहीं, बस मिलेगी ये दो गज़ ज़मींजाने फिर क्यूँ परेशान है आदमी आदमी के लिए

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