नात लिरिक्स

Mat Poochho Bareilly Mein Hum Ne Sau Saal Mein Kya Kya Dekha Hai

मत पूछो बरेली में हम ने सौ साल में क्या क्या देखा है

नात ख़्वान: गुलफ़ाम रज़ा हस्सानीशायर: गुलफ़ाम रज़ा हस्सानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मत पूछो बरेली में हम ने सौ साल में क्या क्या देखा हैदरबार-ए-रज़ा की गलियों में फ़िरदौस का रस्ता देखा है

अम्बर को बरसता देखा है, बादल को गरजता देखा हैरुख़्सत पे वो ताज-ए-शरी'अत की लाखों को सिसकता देखा है

ऐ ताज-ए-शरी'अत ! एक झलक चेहरे की तेरे पाने के लिएकितनों को तड़पता देखा है, कितनों को तरसता देखा है

चूमेगा निगाहें बरसो तक और नाज़ करेगा नस्लों तकजिस ने भी हमारे अख़्तर का वो चाँद सा चेहरा देखा है

जो तुम से मिला गुल बन के खिला, जो तुम से फिरा ज़िल्लत में गिरागुस्ताख़-ए-रज़ा को तो हम ने दर दर पे भटकता देखा है

क्यूँ मेरे रज़ा से जलता है ? इतना सा लिए मुँह फिरता हैक्या तू ने करोड़ों लोगों के सैलाब का मज्मा' देखा है ?

जो जल के हसद में रंग लाए, गुलफ़ाम ! वो सब ही मुरझाएहम ने तो रज़ा के गुलशन का हर फूल महकता देखा है

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