नात लिरिक्स

Rang Chadha Ajmer Ka Mujh Par Deewana Main Khwaja Ka

रंग चढ़ा अजमेर का मुझ पर दीवाना मैं ख़्वाजा का

नात ख़्वान: फ़हीम अख़्तरशायर: अज़हर फ़ारूक़ी बरेलवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मोरे ख़्वाजा ! मोरी अखियाँ तोरे दर्शन को तरसेमोरे हाथों की रेखाएँ तोरे दामन को तरसे

हर दम ख़्वाजा ख़्वाजा पुकारें, तोरे चरनों पे दिल वारेतोरे 'इश्क़ के सारे जोगी, तोरे आँगन को तरसे

रंग चढ़ा अजमेर का मुझ पर, दीवाना मैं ख़्वाजा काचूमने निकला ख़्वाजा का दर, दीवाना मैं ख़्वाजा का

रंग चढ़ा अजमेर का मुझ पर, दीवाना मैं ख़्वाजा का

ऐसा पिया है जाम-ए-चिश्ती, वज्द की छाई वो मस्तीझूम रहा हूँ मैं तो बराबर, दीवाना मैं ख़्वाजा का

रंग चढ़ा अजमेर का मुझ पर, दीवाना मैं ख़्वाजा का

जब ये सुना अजमेर में सदक़ा पूरे साल का बटता हैआया मैं झोली फैला कर, दीवाना मैं ख़्वाजा का

रंग चढ़ा अजमेर का मुझ पर, दीवाना मैं ख़्वाजा का

'उर्स-ए-ख़्वाजा की धूमें हैं सारी दुनिया के अंदरक्यूँ न लुटाऊँ ख़ुशियाँ घर-घर, दीवाना मैं ख़्वाजा का

रंग चढ़ा अजमेर का मुझ पर, दीवाना मैं ख़्वाजा का

हुक्म अगर दें मुझ को ख़्वाजा भर लूँ अना-सागर मैं भीछोटे से कासे के अंदर, दीवाना मैं ख़्वाजा का

रंग चढ़ा अजमेर का मुझ पर, दीवाना मैं ख़्वाजा का

तुम क्या जानो मैं कैसा हूँ, अपनी धुन में रहता हूँख़्वाजा का मैं मस्त-क़लंदर, दीवाना मैं ख़्वाजा का

रंग चढ़ा अजमेर का मुझ पर, दीवाना मैं ख़्वाजा का

रूह को महकाने आया हूँ, अज़हर ! खाने आया हूँख़्वाजा की देगों का लंगर, दीवाना मैं ख़्वाजा का

रंग चढ़ा अजमेर का मुझ पर, दीवाना मैं ख़्वाजा का

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