नात लिरिक्स

Ramzan Ke Mahine Ki Kya Baat Momino | Ramzan Mehrban Ramzan Mehrban

रमज़ान के महीने की क्या बात मोमिनो | रमज़ान मेहरबान रमज़ान मेहरबान

शायर: हनीफ़ सानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

रमज़ान के महीने की क्या बात, मोमिनो !लाया है रहमतों की ये सौग़ात, मोमिनो !

रमज़ान मेहरबान ! रमज़ान मेहरबान !रमज़ान मेहरबान ! रमज़ान मेहरबान !

चारों तरफ़ ही छाने लगा नूर का समाँरहमत का मीं बरसने लगा हर तरफ़ यहाँशैताँ के वसवसों से हुआ पाक ये जहाँरमज़ान की है कैसी करामात, मोमिनो !

रमज़ान मेहरबान ! रमज़ान मेहरबान !रमज़ान मेहरबान ! रमज़ान मेहरबान !

क़ुरआन का हुआ है इसी माह में नुज़ूलहोती है इस महीने में हर इक दु'आ क़ुबूलहर रात इस महीने की रहमत का है हुसूलआती इसी में क़द्र की है रात, मोमिनो !

रमज़ान मेहरबान ! रमज़ान मेहरबान !रमज़ान मेहरबान ! रमज़ान मेहरबान !

तस्बीह और तरावीह भी दिल से करो अदारोज़ा रखेगा नार-ए-जहन्नम से फिर जुदाहै ए'तिकाफ़ भी ये 'इबादत की इक अदारहमान और रहीम वोही ज़ात, मोमिनो !

रमज़ान मेहरबान ! रमज़ान मेहरबान !रमज़ान मेहरबान ! रमज़ान मेहरबान !

सहरी की बरकतें भी बहुत ख़ूब हैं, जनाब !इफ़्तार करना और कराना भी है सवाबजिस ने रखा गो, सानी ! है रमज़ान का आदाबउस के लिए है ख़ूब इन'आमात, मोमिनो !

रमज़ान मेहरबान ! रमज़ान मेहरबान !रमज़ान मेहरबान ! रमज़ान मेहरबान !

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