नात लिरिक्स

Qudsi Khade Hain Hairan Ho Ke Ki Sidra Se Aage Bashar Ja Raha Hai

क़ुदसी खड़े हैं हैरान हो के कि सिदरा से आगे बशर जा रहा है

नात ख़्वान: अक़्सा अब्दुल हक़उपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सल्ले-'अला नबिय्येना, सल्ले-'अला मुहम्मदिनसल्ले-'अला शफ़ी'एना, सल्ले-'अला मुहम्मदिन

सर-ए-ला-मकाँ से तलब हुईसू-ए-मुंतहा वो चले नबीकोई हद है उन के 'उरूज कीसल्लू 'अलैहि व आलिहि

क़ुदसी खड़े हैं हैरान हो केकि सिदरा से आगे बशर जा रहा हैवो बन ठन के अपने ख़ालिक़ से मिलनेसर-ए-'अर्श वो ताजवर जा रहा है

क़ुदसी खड़े हैं हैरान हो केकि सिदरा से आगे बशर जा रहा है

कि जाता है देखो वो बे-ख़ौफ़ कैसेकि सब जानता है राहें वो जैसेवो यूँ जा रहा है जैसे कि कोईघर वाला अपने ही घर जा रहा है

क़ुदसी खड़े हैं हैरान हो केकि सिदरा से आगे बशर जा रहा है

वो क़िस्सा हलीमा के आँगन का पूछोजवानी का छोड़ो, बचपन का पूछोअभी मुस्तफ़ा ने उठाई है उँगलीक़मर से ये पूछो किधर जा रहा है

क़ुदसी खड़े हैं हैरान हो केकि सिदरा से आगे बशर जा रहा है

अक़्सा में जितने भी मुरसल खड़े थेहैरत में सारे के सारे पड़े थेहम उस के पीछे ये क्या पढ़ रहे हैंनमाज़ें वो लेने अगर जा रहा है

क़ुदसी खड़े हैं हैरान हो केकि सिदरा से आगे बशर जा रहा है

कहाँ तू, ऐ शाकिर ! कहाँ तेरी ना'तेंकहाँ अपनी ज़ातें, कहाँ उन की बातेंये क्यूँ कह रहे हो बशर जा रहा हैहक़ीक़त में ख़ैर-उल-बशर जा रहे हैं

क़ुदसी खड़े हैं हैरान हो केकि सिदरा से आगे बशर जा रहा है

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