नात लिरिक्स

Qismat Se Mil Gai Hai Qayadat Huzoor Ki

क़िस्मत से मिल गई है क़यादत हुज़ूर की

नात ख़्वान: सिब्तैन हैदरशायर: मुहम्मद ज़की कैफ़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जो उन के ज़िक्र की महफ़िल सजाए बैठे हैंवो अपने दिल को मदीना बनाए बैठे हैं

क़िस्मत से मिल गई है क़यादत हुज़ूर कीअल्लाह का करम है, 'इनायत हुज़ूर की

क़िस्मत से मिल गई है क़यादत हुज़ूर की

दो लफ़्ज़ हैं ख़ुलासा-ए-'इरफ़ान-ओ-आगहीवहदानियत ख़ुदा की, रिसालत हुज़ूर की

अल्लाह का करम है, 'इनायत हुज़ूर की

क़िस्मत से मिल गई है क़यादत हुज़ूर की

भर ली है हर गदा ने स'आदत से झोलियाँनगरी रहे हमेशा सलामत हुज़ूर की

क़िस्मत से मिल गई है क़यादत हुज़ूर की

या नबी ! सल्ले-'अला, नूर-ए-ख़ुदा, है ये दु'आकाली कमली वाले आक़ा ! मदीने बुला

ये हक़ीक़त है कि जीना वही जीना होगाजब मेरे पेश-ए-नज़र हुस्न-ए-मदीना होगा

शौक़-ए-दिल राहनुमा बन के चलेगा आगेजब रवाँ सू-ए-हरम अपना सफ़ीना होगा

क़िस्मत से मिल गई है क़यादत हुज़ूर की

रब्ब-ए-करीम ! शान-ए-करीमी का वासिताजन्नत में हो नसीब रफ़ाक़त हुज़ूर की

क़िस्मत से मिल गई है क़यादत हुज़ूर की

हर दौर में जदीद तक़ाज़ों के साथ साथहोती है आशकार सदाक़त हुज़ूर की

क़िस्मत से मिल गई है क़यादत हुज़ूर की

कैफ़ी ! ख़ुदा नसीब करे अपने फ़ज़्ल सेउल्फ़त के साथ साथ इता'अत हुज़ूर की

अल्लाह का करम है, 'इनायत हुज़ूर की

क़िस्मत से मिल गई है क़यादत हुज़ूर की

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