नात लिरिक्स

Qismat Se Guzar Jaye Ek Raat Madine Mein | Aaqa Ko Sunaunga Phir Naat Madine Mein

क़िस्मत से गुज़र जाए एक रात मदीने में | आक़ा को सुनाऊँगा फिर नात मदीने में

नात ख़्वान: ज़ैनुल आबिदीन कानपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

क़िस्मत से गुज़र जाए एक रात मदीने मेंआक़ा को सुनाऊँगा फिर ना'त मदीने में

पत्थर भी चमकते हैं, सोना भी निकलता हैशहरों से भी अच्छे हैं देहात मदीने में

अल्लाह रे ताबानी ! शाहों ने क़दम चूमेदेखी ये ग़ुलामों की औक़ात मदीने में

ऐ बाद-ए-सबा ! तुझ को इतना भी नहीं मा'लूमबटती है नवासों की ख़ैरात मदीने में

ऐ मौत ! अभी रुक जा, उस वक़्त चली आनासरकार हों और हम हों एक साथ मदीने में

मेहमान-ए-मुहम्मद को ज़हमत अगर होती हैआते हैं मदद करने सौ हाथ मदीने में

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