नात लिरिक्स

Khuda Ki Rehmat Baras Rahi Hai | Huzoor Tashreef La Rahe Hain

ख़ुदा की रहमत बरस रही है | हुज़ूर तशरीफ़ ला रहे हैं

नात ख़्वान: ज़ैनुल आबिदीन कानपुरीशायर: ज़ैनुल आबिदीन कानपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ख़ुदा की रहमत बरस रही है, हुज़ूर तशरीफ़ ला रहे हैंफ़रिश्ते घर आमिना का जा कर ख़ुद अपने हाथों सजा रहे हैं

नबी का बचपन था क्या सलोना कि चाँद था आप का खिलौनाकभी खिलौने को तोड़ते हैं, कभी खिलौना बना रहे हैं

दुकानें बू-जहल की हैं जितनी, वो एक भी अब नहीं खुलेंगीथे जिस में झूटे ख़ुदा उसी में हुज़ूर ताला लगा रहे हैं

बशर बशर उन को कहने वालो ! बशर की कोई मिसाल तो दोवो डूबे सूरज को सम्त-ए-मग़रिब से देखो वापस बुला रहे हैं

सबा ने पूछा, ऐ फूल ! तेरा लिबास कितना महक रहा हैतो फूल बोला, नबी के तल्वों की हम भी ख़ैरात पा रहे हैं

उन्हीं का का'बा, उन्हीं का तयबा, उन्हीं की दुनिया, उन्हीं का 'उक़्बाये सच है, ज़ैनुल ! उन्हीं का सदक़ा जो आज हम लोग खा रहे हैं

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