नात लिरिक्स

Pada Hun Dar Pe Tere Misl-e-Kah Ya Zahra

पड़ा हूँ दर पे तेरे मिस्ल-ए-काह या ज़हरा

नात ख़्वान: सय्यिद फ़सीहुद्दीन सोहरवर्दीशायर: पीर नसीरुद्दीन नसीरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

पड़ा हूँ दर पे तेरे मिस्ल-ए-काह, या ज़हरा !मिले फ़क़ीर को ख़ैरात-ए-जाह, या ज़हरा !

न फेर आज मुझे अपने दर से तू ख़ालीकि तेरे बाबा हैं शाहों के शाह, या ज़हरा !

तू बादशाह-ए-दो-'आलम की एक शहज़ादीमैं इक ग़रीब तेरी गर्द-ए-राह, या ज़हरा !

भरूँ तो कैसे भरूँ दम तेरी ग़ुलामी काबहुत बड़ी है तेरी बारगाह, या ज़हरा !

तेरे हुसैन का किरदार देख कर अब तकपुकारते हैं मलक वाह वाह, या ज़हरा !

हैं जिन के नूर से उम्मत के रोज़-ओ-शब रौशनहसन हुसैन तेरे मेहर-ओ-माह, या ज़हरा !

ब-रोज़-ए-हश्र न पुर्सां हो जब कोई उस कामिले नसीर को तेरी पनाह, या ज़हरा !

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