नात लिरिक्स

Nematen Bant.ta Jis Samt Wo Zeeshan Gaya

नेमतें बाँटता जिस सम्त वो ज़ीशान गया

नात ख़्वान: सय्यिद फ़सीहुद्दीन सुहरवर्दीशायर: इमाम अहमद रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ने'मतें बाँटता जिस सम्त वो ज़ीशान गयासाथ ही मुंशी-ए-रहमत का क़लम-दान गया

ले ख़बर जल्द कि ग़ैरों की तरफ़ ध्यान गयामेरे मौला मेरे आक़ा ! तेरे क़ुर्बान गया

आह ! वो आँख कि नाकाम-ए-तमन्ना ही रहीहाए ! वो दिल जो तेरे दर से पुर-अरमान गया

दिल है वो दिल जो तेरी याद से मा'मूर रहासर है वो सर जो तेरे क़दमों पे क़ुर्बान गया

उन्हें जाना, उन्हें माना, न रखा ग़ैर से कामलिल्लाहिल-हम्द मैं दुनिया से मुसलमान गया

और तुम पर मेरे आक़ा की 'इनायत न सहीनज्दियो ! कलमा पढ़ाने का भी एहसान गया

आज ले उन की पनाह, आज मदद माँग उन सेफिर न मानेंगे क़ियामत में अगर मान गया

उफ़ रे मुन्किर ये बढ़ा जोश-ए-त'अस्सुब आख़िरभीड़ में हाथ से कम-बख़्त के ईमान गया

जान-ओ-दिल, होश-ओ-ख़िरद सब तो मदीने पहुँचेतुम नहीं चलते, रज़ा ! सारा तो सामान गया

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