नात लिरिक्स

Naat-e-Mustafa Sun Kar Rooh Jab Machalti Hai

नात-ए-मुस्तफ़ा सुन कर रूह जब मचलती है

नात ख़्वान: असद इक़बालउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ना'त-ए-मुस्तफ़ा सुन कर रूह जब मचलती है'आशिक़ों के चेहरे से चाँदनी निकलती है

उन के सदक़े खाते हैं, उन के सदक़े पीते हैंमुस्तफ़ा की चौखट से काएनात पलती है

थाम कर शह-ए-दीं की रहमतों की ऊँगली कोजन्नत-ए-मोहब्बत में ज़िंदगी टहलती है

काश ! वो नज़र आते ख़्वाब के दरीचे सेमेरी दीद-ए-हसरत पहरों आँख मलती है

लफ़्ज़-ए-कुन के जल्वे में मुस्तफ़ा का जल्वा हैनूर-ए-मुस्तफ़ाई में काएनात ढलती है

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