पूछ लो ये नज़ारों सेगुल गुलशन गुलज़ारों सेसूरज चाँद सितारों सेज़र्रों से, मह-पारों सेहर जल्वे का एक बयानमेरे नबी ज़ीशान, मेरे नबी ज़ीशान
सर पे ताज-ए-शफ़ाअ'त हैउन पर ख़त्म नबुव्वत हैज़ात सरापा रहमत हैऐसी उन की सूरत हैजैसे रेहल पे हो क़ुरआ'नमेरे नबी ज़ीशान, मेरे नबी ज़ीशान
नूर-ए-मुजस्सम, नूर-ए-अज़लजिस का नहीं है कोई बदलनूरी क़सीदा, नूरी ग़ज़लदूध में जैसे खिलता कँवलरब्ब-ए-उला का वो मेहमानमेरे नबी ज़ीशान, मेरे नबी ज़ीशान
रहमत-ओ-बरकत वाले हैंनेअ'मत-ओ-जन्नत वाले हैंताज-ए-शफ़ाअ'त वाले हैंऐसी क़ुदरत वाले हैंजिन का कहा, रब का फ़रमानमेरे नबी ज़ीशान, मेरे नबी ज़ीशान
आ'ला हज़रत बोल गएइश्क़ के मोती रोल गएसारी हक़ीक़त खोल गएदे के सबक़ अनमोल गएइश्क़-ए-नबी ईमाँ की जानमेरे नबी ज़ीशान, मेरे नबी ज़ीशान
हक़ की बात बताते हैंजाम-ए-करम छलकाते हैंसीधी राह दिखाते हैंजन्नत तक पहुँचाते हैंसब पे असद ! उन का एहसानमेरे नबी ज़ीशान, मेरे नबी ज़ीशान
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