गुलशन गुलशन, सहरा सहरा, बात हुई मशहूरमाह-ए-रबिउन्नूर ने बख़्शा रहमत का दस्तूर
आया रबिउन्नूर, आया रबिउन्नूरआया रबिउन्नूर, आया रबिउन्नूर
प्यारे नबी का नूर चला जब आदम की पेशानी सेपुश्त-ए-ख़लीली तक पहुँचा है रहमत की तुग़्यानी सेआदम ता ईसा कहते हैं आया रब का नूर
आया रबिउन्नूर, आया रबिउन्नूरआया रबिउन्नूर, आया रबिउन्नूर
आमिना बी ये कहती हैं वो कैसी रात सुहानी थीहूर-ओ-मलाइक, मरियम-ओ-सारा की घर पे दरबानी थीझूला झुलाने आई नबी को ख़ुल्द-ए-बरीं की हूर
आया रबिउन्नूर, आया रबिउन्नूरआया रबिउन्नूर, आया रबिउन्नूर
सोचा था इबलीस ने रब के बंदों को बहकाएँगेकुफ़्र-ओ-शिर्क में डाल के उन को दोज़ख़ में पहुँचाएँगेसारे इबलीसी मंसूबे हो गए चकनाचूर
आया रबिउन्नूर, आया रबिउन्नूरआया रबिउन्नूर, आया रबिउन्नूर
आज ज़माने को देते हैं इश्क़-ओ-वफ़ा का जाम रज़ाख़ून-ए-जिगर से दिल के वरक़ पर लिखते हैं पैग़ाम रज़ारहमत-ए-आलम, नूर-ए-मुजस्सम से मत होना दूर
आया रबिउन्नूर, आया रबिउन्नूरआया रबिउन्नूर, आया रबिउन्नूर
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