नात लिरिक्स

Na Kahin Se Door Hain Manzilein Na Koi Qareeb Ki Baat Hai

न कहीं से दूर हैं मंज़िलें न कोई क़रीब की बात है

नात ख़्वान: क़ारी वहीद ज़फ़र क़ासमीशायर: मुनव्वर बदायूनीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

न कहीं से दूर हैं मंज़िलें, न कोई क़रीब की बात हैजिसे चाहे उस को नवाज़ दे, ये दर-ए-हबीब की बात है

जिसे चाहा दर पे बुला लिया, जिसे चाहा अपना बना लियाये बड़े करम के हैं फ़ैसले, ये बड़े नसीब की बात है

वो भटक के राह में रह गई, ये मचल के दर से लिपट गईवो किसी अमीर की शान थी, ये किसी ग़रीब की बात है

मुझे जाँ से बढ़ के 'अज़ीज़ दिल, मेरा दर्द दिल से 'अज़ीज़-तरहै जो दर्द से भी 'अज़ीज़-तर, वो मेरे तबीब की बात है

मैं बुरों से लाख बुरा सही, मगर उन से है मेरा वास्तामेरी लाज रख ले, मेरे ख़ुदा ! ये तेरे हबीब की बात है

वो ख़ुदा नहीं ब-ख़ुदा नहीं, वो मगर ख़ुदा से जुदा नहींवो हैं क्या मगर वो हैं क्या नहीं, ये मुहिब हबीब की बात है

तेरे हुस्न से तेरी शान तक है निगाह-ओ-'अक़्ल का फ़ासिलाये ज़रा ब'ईद का ज़िक्र है, वो ज़रा क़रीब की बात है

तुझे ऐ मुनव्वर-ए-बे-नवा ! दर-ए-शह से चाहिए और क्याजो नसीब हो कभी सामना तो बड़े नसीब की बात है

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