नात लिरिक्स

Musallam Hai Zamane Mein Wafa Siddiq-e-Akbar Ki

मुसल्लम है ज़माने में वफ़ा सिद्दीक़-ए-अकबर की

नात ख़्वान: मौलाना बिलाल रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मुसल्लम है ज़माने में वफ़ा सिद्दीक़-ए-अकबर कीरिज़ा-ए-मुस्तफ़ा ही है रिज़ा सिद्दीक़-ए-अकबर की

मुसल्लम है ज़माने में वफ़ा सिद्दीक़-ए-अकबर की

वही अत्क़ा, वही औफ़ा, वही आ'दल, वही अफ़ज़लहै कैसी मुनफ़रिद हर हर 'अदा सिद्दीक़-ए-अकबर की

मुसल्लम है ज़माने में वफ़ा सिद्दीक़-ए-अकबर की

लुटाया जिस ने माल-ओ-जान को राह-ए-नुबुव्वत मेंनबी पे हर क़ुराबत थी फ़िदा सिद्दीक़-ए-अकबर की

मुसल्लम है ज़माने में वफ़ा सिद्दीक़-ए-अकबर की

दिया किस को मुसल्ला मुस्तफ़ा ने भी, ख़ुदा ने भीनज़र आई ये 'अज़मत बारहा सिद्दीक़-ए-अकबर की

मक़ाम-ए-अफ़ज़ल-ए-उम्मत को बाहम तोलने वालो'अली मौला से पूछो इक़्तिदा सिद्दीक़-ए-अकबर की

मुसल्लम है ज़माने में वफ़ा सिद्दीक़-ए-अकबर की

वही चमका ज़माने में विलायत की बुलंदी परपड़ी इक बार भी जिस पे निगाह सिद्दीक़-ए-अकबर की

मुसल्लम है ज़माने में वफ़ा सिद्दीक़-ए-अकबर की

ऐ 'आसिफ़ ! ये निगाह-ए-मुस्तफ़ा की ही तजल्ली हैमिली सादात से मुझ को 'अता सिद्दीक़-ए-अकबर की

मुसल्लम है ज़माने में वफ़ा सिद्दीक़-ए-अकबर की

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