नात लिरिक्स

Musallam Hai Muhammad Se Wafa Siddiq-e-Akbar Ki

मुसल्लम है मुहम्मद से वफ़ा सिद्दीक़-ए-अकबर की

नात ख़्वान: ख़ालिद हसनैन ख़ालिदशायर: पीर नसीरुद्दीन नसीरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मुसल्लम है मुहम्मद से वफ़ा सिद्दीक़-ए-अकबर कीनहीं भूली है दुनिया को अदा सिद्दीक़-ए-अकबर की

हम उन की मदह-गोई दाख़िल-ए-सुन्नत न क्यूँ समझेंनबी ता'रीफ़ करते थे सदा सिद्दीक़-ए-अकबर की

रसूलुल्लाह के लुत्फ़-ओ-करम से ये मिला रुत्बामदद करता रहा हर-दम ख़ुदा सिद्दीक़-ए-अकबर की

कलामुल्लाह में है तज़्किरा उन के महामिद काज़माने से बयाँ हो शान क्या सिद्दीक़-ए-अकबर की

नजाबत में, शराफ़त में, रफ़ाक़त में, सख़ावत मेंहुई शोहरत ये किस की जा-ब-जा ? सिद्दीक़-ए-अकबर की

वो ख़ुद इक सिद्क़ थे, कोई अगर इस राज़ को जानेसदाक़त ही सदाक़त थी सदा सिद्दीक़-ए-अकबर की

ज़मीं पर धूम है उन की, फ़लक पर उन के चर्चे हैंज़मीन-ओ-आस्माँ पर है सना सिद्दीक़-ए-अकबर की

मुअर्रिख़ दम-ब-ख़ुद है, सर-ब-सज्दा है क़लम उस कात'आलल्लाह ! ये शान-ए-'उला सिद्दीक़-ए-अकबर की

जो उन का है, रसूलुल्लाह उस के हैं, ख़ुदा उस काविलायत का वसीला है विला सिद्दीक़-ए-अकबर की

कमी कैसी, नसीर ! उन के मदारिज में, मरातिब मेंबड़ी तौक़ीर है, नाम-ए-ख़ुदा ! सिद्दीक़-ए-अकबर की

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