नात लिरिक्स

Mujhe Aap Ne Bulaya Ye Karam Nahin To Kya Hai

मुझे आप ने बुलाया ये करम नहीं तो क्या है

नात ख़्वान: जावेद हुसैन सिद्दीक़ीशायर: क़मर अंजुमउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मुझे आप ने बुलाया, ये करम नहीं तो क्या हैमेरा मर्तबा बढ़ाया, ये करम नहीं तो क्या है

मुझे जब भी ग़म ने घेरा, मेरा साथ सब ने छोड़ातू मेरी मदद को आया, ये करम नहीं तो क्या है

मेरी ज़िंदगी के दामन पे बरस पड़ीं बहारेंतेरे दर्द ने रुलाया, ये करम नहीं तो क्या है

कभी मौत की भँवर से, कभी मौज-ए-पुर-ख़तर सेमेरी नाव को बचाया, ये करम नहीं तो क्या है

मुझे वक़्फ़-ए-ज़िक्र कर के, मेरी रूह में उतर केमेरे दिल को दिल बनाया, ये करम नहीं तो क्या है

मैं ग़मों की धूप में जब तेरा नाम ले के निकलामिला रहमतों का साया, ये करम नहीं तो क्या है

जहाँ छुट गए किनारे, जहाँ छिन गए सहारेतुझे अपने पास पाया, ये करम नहीं तो क्या है

जो है यावरों का यावर, जो है दस्तगीर-ए-'आलमवो मेरी मदद को आया, ये करम नहीं तो क्या है

मेरे ज़ेहन तक में ऐसी कोई इर्तिक़ा नहीं थीमुझे क्या से क्या बनाया, ये करम नहीं तो क्या है

जो फ़रेब फ़ासले का मुझे दे रहा था पैहमवो हिजाब भी उठाया, ये करम नहीं तो क्या है

मुझे हौसले वो बख़्शे तेरे क़ुर्ब के यक़ीं नेमैं ग़मों में मुस्कुराया, ये करम नहीं तो क्या है

मेरी लग़्ज़िशों को पैहम मिले आप के सहारेमैं गिरा तो ख़ुद उठाया, ये करम नहीं तो क्या है

मैं भटक के रह गया था, कहीं और बह गया थामुझे रास्ता दिखाया, ये करम नहीं तो क्या है

ये शरफ़ बड़ा शरफ़ है, मेरा रुख़ तेरी तरफ़ हैमुझे ना'त-गो बनाया, ये करम नहीं तो क्या है

दर-ए-मुस्तफ़ा से, अंजुम ! मैं ख़ुद आ गया, मगर दिलकभी लौट कर न आया, ये करम नहीं तो क्या है

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