नात लिरिक्स

Mujh Ko Ramzaan Ka Mahina Achchha Lagta Hai

मुझ को रमज़ाँ का महीना अच्छा लगता है

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरीशायर: अल्लामा निसार अली उजागरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

आया अल्लाह का मेहमानआया है माह-ए-रमज़ानले कर हाथों में क़ुरआँआया है माह-ए-रमज़ान

रहमत-ए-रमज़ान ! रहमत-ए-रमज़ान !रहमत-ए-रमज़ान ! रहमत-ए-रमज़ान !

मुझ को रमज़ाँ का महीना अच्छा लगता हैसहरी-ओ-इफ़्तार करना अच्छा लगता है

मुझ को रमज़ाँ का महीना अच्छा लगता हैमुझ को रमज़ाँ का महीना अच्छा लगता है

रमज़ान के रोज़े रखूँगामैं सारी नमाज़ें पढ़ूँगाक़ुरआँ की तिलावत करूँगाऔर दीन की बातें सीखूँगा

रहमान राज़ी होगा, रहमान राज़ी होगारहमान राज़ी होगा, रहमान राज़ी होगा

देखो फ़लक़ पे चाँद चमका, माह-ए-रमज़ाँ आयानिखरा निखरा हर इक चेहरा, माह-ए-रमज़ाँ आयापूरे महीने रोज़े रखना अच्छा लगता है

मुझ को रमज़ाँ का महीना अच्छा लगता हैमुझ को रमज़ाँ का महीना अच्छा लगता है

बच्चो ! रोज़ा रखना हैक़ुर्ब ख़ुदा का पाना है

राज़ी होता है रहमानआया है माह-ए-रमज़ान

रमज़ाँ में मोमिन के मुक़द्दर रौशन लगते हैंमस्जिद के मेहराब-ओ-मिम्बर रौशन लगते हैंमस्जिद में लोगों का बढ़ना अच्छा लगता है

मुझ को रमज़ाँ का महीना अच्छा लगता हैमुझ को रमज़ाँ का महीना अच्छा लगता है

रमज़ान के रोज़े रखूँगामैं सारी नमाज़ें पढ़ूँगाक़ुरआँ की तिलावत करूँगाऔर दीन की बातें सीखूँगा

रब की रहमत घर घर उतरी, आया है मेहमानमज़े मज़े की ख़ुश्बू फैली, सजे हैं दस्तर-ख़्वानइफ़्तारी में मिल कर खाना अच्छा लगता है

मुझ को रमज़ाँ का महीना अच्छा लगता हैमुझ को रमज़ाँ का महीना अच्छा लगता है

गुंबद-ए-ख़ज़रा के साए में हम सब बैठे होंदस्तर-ख़्वान सजा हो, लब पर उन की नातें होंतयबा में इफ़्तारी करना अच्छा लगता है

मुझ को रमज़ाँ का महीना अच्छा लगता हैमुझ को रमज़ाँ का महीना अच्छा लगता है

मुझे नेक बनना है, मुझे नेक बनना हैमुझे नेक बनना है, मुझे नेक बनना है

नफ़रतों को छोड़ के, टूटे दिलों को जोड़ केमाह-ए-रमज़ाँ की बरकत से एक बनना है

मुझे नेक बनना है, मुझे नेक बनना हैमुझे नेक बनना है, मुझे नेक बनना है

रिश्वत लेना और देना, सूद पे बिज़नेस क्यूँ करनामाह-ए-रमज़ाँ की बरकत से बचते रहना है

मुझे नेक बनना है, मुझे नेक बनना हैमुझे नेक बनना है, मुझे नेक बनना है

ग़ीबत और चुग़ल-ख़ोरी नेकी से है ग़द्दारीमाह-ए-रमज़ाँ की बरकत से हक़ ही कहना है

मुझे नेक बनना है, मुझे नेक बनना हैमुझे नेक बनना है, मुझे नेक बनना है

'अशरा-ए-रहमत, 'अशरा-ए-बख़्शिश, नार से आज़ादीमाँग, उजागर ! अपनी बख़्शिश, बन जा फ़रियादीरब से दु'आएँ करते रहना अच्छा लगता है

मुझ को रमज़ाँ का महीना अच्छा लगता हैमुझ को रमज़ाँ का महीना अच्छा लगता है

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