नात लिरिक्स

Muhammad Sa Koi Dulha Nahin Hai

मुहम्मद सा कोई दूल्हा नहीं है

नात ख़्वान: मुहम्मद आज़म क़ादरीशायर: मुहम्मद अकरम काविशउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मुहम्मद सा कोई दूल्हा नहीं हैकिसी पे यूँ सजा सेहरा नहीं है

दिखाओ मुझ को तो कोई वो इंसाँजो उन के टुकड़ों पे पलता नहीं है

बुंलद जितना है रुत्बा मुस्तफ़ा काकिसी का यूँ बुलंद रुत्बा नहीं है

है हद जिब्रील की सिदरा पे, लोगो !किया महबूब से पर्दा नहीं है

फ़रिश्तों ने कहा रब से, ऐ मौला !हसीं ऐसा कोई मुखड़ा नहीं है

'अली के हाथ है अहमद का झंडाये कोई आम सा झंडा नहीं है

है क़ब्ज़ा दिल पे, काविश ! मुस्तफ़ा काकोई आँखों में अब जचता नहीं है

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