नात लिरिक्स

Milta Hai Ham Ko Kya Kya ! Khwaja ! Teri Gali Mein

मिलता है हम को क्या क्या ! ख़्वाजा ! तेरी गली में

नात ख़्वान: शब्बीर बरकाती - हस्सान रज़ा क़ादरीशायर: सय्यिद नूर मियाँउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या ख़्वाजा पिया ! या ख़्वाजा पिया !या ख़्वाजा पिया ! या ख़्वाजा पिया !

मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !

निस्बत से तेरी मेरा ज़माने में भरम हैऐसा, मेरे ख़्वाजा ! तेरा अंदाज़-ए-करम है

मिलता है हम को क्या क्या ! ख़्वाजा ! तेरी गली मेंशोहरत तेरी गली में, रुत्बा तेरी गली में

मिलता है हम को क्या क्या !

लाखों भटकते लोगों को मिल गया है अक्सरदीन-ए-मुहम्मदी का रस्ता तेरी गली में

दीन-ए-मुहम्मदी का

तेरा दर मिल गया हम को, सहारा हो तो ऐसा हो !तेरे टुकड़ों पे पलते हैं, गुज़ारा हो तो ऐसा हो !

दीन-ए-मुहम्मदी का रस्ता तेरी गली में

दीन-ए-मुहम्मदी का

मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !

अफ़सर हों या मिनिस्टर, आते हैं सब यहाँ परदेखा बड़े बड़ों को मँगता तेरी गली में

देखा बड़े बड़ों को

सरापा दीद बन कर हसरत-ए-दीदार में आएजिसे फूलों में रहना हो वो इस गुलज़ार में आए

जो बेताब-ए-तमन्ना हो, तेरी सरकार में आएख़ुदा जिस को न मिलता हो वो इस दरबार में आए

देखा बड़े बड़ों को मँगता तेरी गली में

देखा बड़े बड़ों को

मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !

ए दुनिया वाले ! 'इश्क़ की दुनिया में आ के देखगर रब को समझना है तो सज्दे में जा के देखसज्दे को समझना है तो सर को कटा के देखगर सर को समझना है तो दर पर झुका के देखगर दर को समझना है तो ख़ुद को मिटा के देखइतने में भी अगर न तुझे आए कुछ समझचेहरे से अपने पीर का पर्दा उठा के देख

हो क़ुत्ब या क़लंदर, जमशेद या सिकंदरहम ने सभी को पाया ख़्वाजा तेरी गली में

हम ने सभी को पाया

मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !

दुनिया को जो पिलाया अशरफ़ पिया ने आ कररिंदों को मिल गया वो प्याला तेरी गली में

रिंदों को मिल गया वो

उन के दरिया-ए-करम से माँग लो दो चार बूँदवर्ना महशर में प्याला ढूँढते रह जाओगे

रिंदों को मिल गया वो प्याला तेरी गली में

रिंदों को मिल गया वो

मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !

मुज़्तर था ये मुनव्वर, तस्कीन-ए-दिल की ख़ातिरइस ने सुकूँ का पाया सदक़ा तेरी गली में

इस ने सुकूँ का पाया

बिगड़ा, बिगड़ा नहीं रहता है, सँवर जाएगासब्र से काम ले, दामन तेरा भर जाएगा

इस ने सुकूँ का पाया सदक़ा तेरी गली में

इस ने सुकूँ का पाया

मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !

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