नात लिरिक्स

Meri Jholi Mein Rehte Hain Sada Tukde Muhammad Ke | Meri Jholi Mein Rehte Hain Sada Tukre Muhammad Ke

मेरी झोली में रहते हैं सदा टुकड़े मुहम्मद के

नात ख़्वान: हाफ़िज़ अहमद रज़ा क़ादरीशायर: सय्यिद अल्ताफ़ शाह काज़मीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मेरी झोली में रहते हैं सदा टुकड़े मुहम्मद केअज़ल से खा रहा है ये गदा टुकड़े मुहम्मद के

पड़ी है क्या मुझे शाहों के दर से जा के मैं माँगूखिलाता है मुझे मेरा ख़ुदा टुकड़े मुहम्मद के

मेरे रस्ते की हर मुश्किल गुज़र जाती है कतरा करकि देते हैं मुझे मुश्किल-कुशा टुकड़े मुहम्मद के

इन्हें खा कर अबू-बक्र-ओ-'उमर, 'उस्मान बनते हैंये रुत्बे में हैं कुछ ऐसे जुदा टुकड़े मुहम्मद के

हैं शहर-ए-'इल्म ख़ुद आक़ा, 'अली हैं उस का दरवाज़ातू दरवाज़े से आ और खाए जा टुकड़े मुहम्मद के

अबू-बक्र-ओ-'उमर, 'उस्माँ, 'अली इब्न-ए-अबी-तालिबलुटाते हैं ये दुनिया में सदा टुकड़े मुहम्मद के

मेरे मौला ! 'अली-ओ-फ़ातिमा, हसनैन के सदक़ेमेरी नस्लों को भी करना 'अता टुकड़े मुहम्मद के

तेरा दामन कभी, अल्ताफ़ ! ख़ाली रह नहीं सकताकि देते हैं तुझे आल-ए-'अबा टुकड़े मुहम्मद के

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