नात लिरिक्स

Aye Mere Khaliq Ye Iltija Hai Mujhe Bhi Apna Tu Ghar Dikha De

ऐ मेरे ख़ालिक़ ये इल्तिजा है मुझे भी अपना तू घर दिखा दे

नात ख़्वान: हाफ़िज़ अहमद रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

झुका के सर यही सज्दों में माँगता हूँ दु'आकि तेरे घर की ज़ियारत का शरफ़ मिल जाए

ऐ मेरे ख़ालिक़ ! ये इल्तिजा है, मुझे भी अपना तू घर दिखा देफ़रीज़ा हज का अदा करूँ मैं, कि हज पे मौला ! मुझे बुला ले

ऐ मेरे ख़ालिक़ ! ये इल्तिजा है, मुझे भी अपना तू घर दिखा दे

मैं ख़ाना-का'बा के गिर्द घूमूँ, ग़िलाफ़-ए-का'बा को मैं भी चूमूँमैं तिश्ना-लब हूँ सबील-ए-ज़मज़म, ऐ मेरे मालिक ! मुझे पिला दे

ऐ मेरे ख़ालिक़ ! ये इल्तिजा है, मुझे भी अपना तू घर दिखा दे

बहुत ही 'आसी हूँ मानता हूँ, तेरी करीमी भी जानता हूँकि अपने रहम-ओ-करम के सदक़े तू मेरे सारे गुनाह मिटा दे

ऐ मेरे ख़ालिक़ ! ये इल्तिजा है, मुझे भी अपना तू घर दिखा दे

सफ़ा-ओ-मरवा के दरमियाँ जो, चली थी बीबी जहाँ जहाँ जोमैं हाजरा की 'अज़ीम सुन्नत अदा करूँगा, तू हौसला दे

ऐ मेरे ख़ालिक़ ! ये इल्तिजा है, मुझे भी अपना तू घर दिखा दे

फ़रीज़ा क़ुर्बानी का अदा हो, कि जिस में शामिल तेरी रज़ा होमैं चाहता हूँ, ऐ मेरे मौला ! तू जैसा चाहे मुझे बना दे

ऐ मेरे ख़ालिक़ ! ये इल्तिजा है, मुझे भी अपना तू घर दिखा दे

महीना हज का जो आ रहा है, स'ईद 'आक़िल की इल्तिजा हैजो सू-ए-का'बा चले हैं हाजी, इन हाजियों में मुझे मिला दे

ऐ मेरे ख़ालिक़ ! ये इल्तिजा है, मुझे भी अपना तू घर दिखा दे

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