नात लिरिक्स

Haal-e-Dil Kis Ko Sunaaen Aap Ke Hote Hue

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुए

नात ख़्वान: अहमद रज़ा क़ादरीशायर: सय्यिद अल्ताफ़ शाह काज़मीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुएक्यूँ किसी के दर पे जाएँ, आप के होते हुए

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुए

मैं ग़ुलाम-ए-मुस्तफ़ा हूँ, ये मेरी पहचान हैग़म मुझे क्यूँ-कर सताएँ, आप के होते हुए

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुए

अपना जीना, अपना मरना अब इसी चौखट पे हैहम कहाँ, सरकार ! जाएँ, आप के होते हुए

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुए

कह रहा है आप का रब 'अन्त फ़ीहिम' आप सेक्यूँ इन्हें मैं दूँ सज़ाएँ, आप के होते हुए

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुए

सामने है, ए 'अली के लाल ! उस्वा आप काक्यूँ किसी का ख़ौफ़ खाएँ, आप के होते हुए

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुए

मैं ये कैसे मान जाऊँ ! शाम के दरबार मेंछीन ले कोई रिदाएँ, आप के होते हुए

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुए

ये तो हो सकता नहीं ! ये बात मुमकिन ही नहीं !मेरे घर आलाम आएँ, आप के होते हुए

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुए

कौन है, अल्ताफ़ ! अपना हाल-ए-दिल जिस से कहेंज़ख़्म-ए-दिल किस को दिखाएँ, आप के होते हुए

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