नात लिरिक्स

Mere Wird-e-Lab Hai Nabi Nabi | Main Mareez-e-Ishq-e-Rasool Hoon

मेरे विर्द-ए-लब है नबी नबी | मैं मरीज़-ए-इश्क़-ए-रसूल हूँ

नात ख़्वान: क़ारी वहीद ज़फ़र क़ासमीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मेरे विर्द-ए-लब है नबी नबी, मेरा दिल मक़ाम-ए-हबीब हैमैं मरीज़-ए-'इश्क़-ए-रसूल हूँ, वो हबीब मेरा तबीब है

मेरा उस गली से है वासिता, जहाँ सर झुकाते हैं अस्फ़ियाजहाँ रहमतों का नुज़ूल है, वो जो 'अर्श-ए-हक़ के क़रीब है

मैं बड़ा अमीर-ओ-कबीर हूँ, शह-ए-दो-सरा का असीर हूँदर-ए-मुस्तफ़ा का फ़क़ीर हूँ, मेरा रिफ़'अतों पे नसीब है

मैं ग़म-ओ-अलम में हूँ मुब्तला, कोई क्या करेगा मेरी दवामेरा दो जहाँ में तेरे सिवा, शहा ! और कौन तबीब है

वो भी ख़ूब दिन थे मलाइका मेरे सामने थे जो सर-निगूँवो मेरा 'उरूज-ए-कमाल था, ये ज़वाल कितना 'अजीब है

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