नात लिरिक्स

Mere Tajushsharia Ki Kya Shaan Hai

मेरे ताजुश्शरीआ की क्या शान है

नात ख़्वान: ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरीशायर: मुहम्मद आसिमुल-क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

गुलशन-ए-आ'ला-हज़रत की जो जान हैमेरे ताजुश्शरी'आ की क्या शान हैमस्लक-ए-आ'ला-हज़रत की पहचान हैमेरे ताजुश्शरी'आ की क्या शान है

जिस के वालिद मुफ़स्सिर हैं क़ुरआन केजिस के दादा मुहाफ़िज़ हैं ईमान केजिस का नाना बरेली का सुलतान हैमेरे ताजुश्शरी'आ की क्या शान है

गुलशन-ए-आ'ला-हज़रत की जो जान हैमेरे ताजुश्शरी'आ की क्या शान है

जिस के बाबा वली, जिस के ताया वलीजिस के दादा वली, जिस के नाना वलीजिस की अज़मत पे हर एक क़ुर्बान हैमेरे ताजुश्शरी'आ की क्या शान है

गुलशन-ए-आ'ला-हज़रत की जो जान हैमेरे ताजुश्शरी'आ की क्या शान है

'इल्म-ओ-तक़वा की जो प्यारी तस्वीर हैजिस ने पाई अज़ीमत की तनवीर हैइस्तिक़ामत की मज़बूत चट्टान हैमेरे ताजुश्शरी'आ की क्या शान है

गुलशन-ए-आ'ला-हज़रत की जो जान हैमेरे ताजुश्शरी'आ की क्या शान है

जो 'उलूम-ए-रज़ा का है वारिस बनाजिस के सर फ़ख़्र-ए-अज़हर का सेहरा सजावो बरेली का अख़्तर रज़ा ख़ान हैमेरे ताजुश्शरी'आ की क्या शान है

गुलशन-ए-आ'ला-हज़रत की जो जान हैमेरे ताजुश्शरी'आ की क्या शान है

तेज़ तलवार से जिस की तहरीर हैऔर बिजली की मानिंद तक़रीर हैदुश्मन-ए-दीन जिस से परेशान हैमेरे ताजुश्शरी'आ की क्या शान है

गुलशन-ए-आ'ला-हज़रत की जो जान हैमेरे ताजुश्शरी'आ की क्या शान है

जिस की नज़र-ए-विलायत के हैं तज़्किरेअब भी जारी करामत के हैं सिलसिलेहिन्द में चार-सू जिस का फ़ैज़ान हैमेरे ताजुश्शरी'आ की क्या शान है

गुलशन-ए-आ'ला-हज़रत की जो जान हैमेरे ताजुश्शरी'आ की क्या शान है

इक सरों का समंदर बरेली में थामेरे मुर्शिद का जिस दम जनाज़ा उठाआज भी 'अक़्ल-ए-इंसान हैरान हैमेरे ताजुश्शरी'आ की क्या शान है

गुलशन-ए-आ'ला-हज़रत की जो जान हैमेरे ताजुश्शरी'आ की क्या शान है

हुस्न-ए-अख़्तर को कैसे करूँ मैं बयाँजिस के चेहरे को मैं देखता रह गयादेख कर जिस को मुस्काया ईमान हैमेरे ताजुश्शरी'आ की क्या शान है

गुलशन-ए-आ'ला-हज़रत की जो जान हैमेरे ताजुश्शरी'आ की क्या शान है

कर रहा हूँ मैं मुर्शिद की 'अज़मत बयाँमेरे पेश-ए-नज़र इन का है आस्ताँमेरे अख़्तर रज़ा का ये फ़ैज़ान हैमेरे ताजुश्शरी'आ की क्या शान है

गुलशन-ए-आ'ला-हज़रत की जो जान हैमेरे ताजुश्शरी'आ की क्या शान है

कुफ़्र की आँधियों से भी टकरा गयारब ने बख़्शा था ऐसा इसे हौसला'आसिम-उल-क़ादरी जिस पे क़ुर्बान हैमेरे ताजुश्शरी'आ की क्या शान है

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