नात लिरिक्स

Mere Maula Mere Yawar Mere Mushkil Kusha Khwaja

मेरे मौला मेरे यावर मेरे मुश्किल-कुशा ख़्वाजा

नात ख़्वान: सय्यिद कैफ़ी अली रज़वीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मेरे मौला मेरे यावर मेरे मुश्किल-कुशा ख़्वाजा !ग़रीबों का दो 'आलम में तुम्ही हो आसरा, ख़्वाजा !

मेरी औक़ात ही क्या है लिखूँ तेरी सना, ख़्वाजा !लिखूँ जो भी तेरा रुत्बा है उस से मा-वरा, ख़्वाजा !

रसूलुल्लाह ने तुम को हुकूमत हिन्द की बख़्शीरहोगे तुम क़यामत तक यहाँ फ़रमाँ-रवा, ख़्वाजा !

सदाक़त में, 'अदालत में, सख़ावत में, शुजा'अत मेंनबी के चार यारों का हैं रौशन आईना ख़्वाजा

हुसैन इब्न-ए-'अली हैं दीं, बिना-ए-दीं, पनाह-ए-दींखुले हम पर तेरे अश'आर से असरार, या ख़्वाजा !

सलातीन-ए-जहाँ दर पर भिकारी बन के आते हैंहुकूमत ले के फिरते हैं तेरे दर के गदा, ख़्वाजा !

तेरे दरबार-ए-आली में दु'आएँ रद नहीं होतीइमाम अहमद रज़ा ने अपने फ़तवे में लिखा, ख़्वाजा !

इमाम अहमद रज़ा ने ये ब-ख़त्त-ए-नूर लिक्खा हैनिशान-ए-ख़ुल्द है तेरा मुबारक ज़ाविया, ख़्वाजा !

इमाम अहमद रज़ा ने सुन्नियों को ये बताया हैदिलेरी दबदबा शौकत तेरे औसाफ़, या ख़्वाजा !

वहाबी लाख फ़तवे शिर्क के बक लें मगर सुन्नीमदद के वास्ते तुम को पुकारेंगे सदा, ख़्वाजा !

मुसलमानो ! न घबराओ हुकूमत के मज़ालिम सेतुम्हारी ज़िंदगी है और दुश्मन की क़ज़ा ख़्वाजा

सबूर-ए-क़ादरी रज़वी भला क्यूँ कर फिरे ख़ालीतेरे दरबार में इस का वसीला है रज़ा, ख़्वाजा !

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