दिलो-निगाह की दुनिया नई नई हुई हैदुरूद पढ़ते ही ये कैसी रौशनी हुई है
मैं बस युहीं तो नहीं आ गया हूं महफ़िल मेंकहीं से इज़्न मिला है तो हाज़री हुई है
ये सर उठाए जो मैं जा रहा हूं जानिबे-ख़ुल्दमेरे लिये मेरे आक़ा ने बात की हुई है
रज़ा पुल से अब वज्द करते गुज़रियेमेरे लिये मेरे आक़ा ने बात की हुई है
क्यूं न पलड़ा तेरे आ'माल का भारी हो नसीरतेरे लिये तेरे आक़ा ने बात की हुई है
ब-रोज़े महशर, ब-वक़्ते-पुर्सिश मुझे जो देखा फ़रिश्ते बोलेतेरे लिये तेरे आक़ा ने बात की हुई है
दोज़ख में मैं तो क्या ! मेरा साया न जाएगामेरे लिये मेरे आक़ा ने बात की हुई है
ऐ फ़रिश्तो ! मेरे आ'माल न तोलो ठेहरोमेरे लिये मेरे आक़ा ने बात की हुई है
मुझे यक़ीन है वो आएँगे वक़्ते-आख़िर भीमैं कह सकूंगा ज़ियारत अभी अभी हुई है
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