नात लिरिक्स

Mere Aaqa ! Mere Maula ! Mujhe Tayba Bula Leeje

मेरे आक़ा ! मेरे मौला ! मुझे तयबा बुला लीजे

नात ख़्वान: ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरीशायर: मुहम्मद आसिम-उल-क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मेरे आक़ा ! मेरे मौला ! मुझे तयबा बुला लीजेमेरी बे-चैन आँखों को हरा-गुंबद दिखा दीजे

मेरे आक़ा ! मेरे मौला ! मुझे तयबा बुला लीजे

मदीना जब कोई जाता है तो दिल मेरा रोता हैबुला लीजे मुझे भी अब, मेरे आक़ा ! बुला लीजे

मेरे आक़ा ! मेरे मौला ! मुझे तयबा बुला लीजे

तवाफ़-ए-ख़ाना-ए-का'बा करूँ, ऐसा करम कर दोहरम के, या रसूलल्लाह ! मिनारे भी दिखा दीजे

मेरे आक़ा ! मेरे मौला ! मुझे तयबा बुला लीजे

ग़िलाफ़-ए-ख़ाना-ए-का'बा पकड़ कर रोऊँ जी भर करसुनाऊँ हाल-ए-दिल अपना, वो लम्हा अब 'अता कीजे

मेरे आक़ा ! मेरे मौला ! मुझे तयबा बुला लीजे

मैं जाना चाहता हूँ, मुफ़्लिसी जाने नहीं देतीख़ुदा के वास्ते, आक़ा ! मेरी ग़ुर्बत मिटा दीजे

मेरे आक़ा ! मेरे मौला ! मुझे तयबा बुला लीजे

न जाने कब फ़रिश्ता मौत का आ जाए, ए आक़ा !ख़ुदा-रा, मौत से पहले मुझे रौज़ा दिखा दीजे

मेरे आक़ा ! मेरे मौला ! मुझे तयबा बुला लीजे

कबूतर देख लूँ, ए काश ! मैं शहर-ए-मदीना केए आक़ा ! गुलशन-ए-तयबा के बुलबुल भी दिखा दीजे

मेरे आक़ा ! मेरे मौला ! मुझे तयबा बुला लीजे

तमन्ना है ग़ुलाम-ए-मुस्तफ़ा की और 'आसिम कीबक़ी'-ए-पाक में मदफ़न हमें, आक़ा ! 'अता कीजे

मेरे आक़ा ! मेरे मौला ! मुझे तयबा बुला लीजे

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