नात लिरिक्स

Mere Aaqa Aaye Hain Saj Gaya Zamana Hai

मेरे आक़ा आए हैं सज गया ज़माना है

नात ख़्वान: ज़ोहैब अशरफ़ीशायर: मुहम्मद आसिम-उल-क़ादरी मुरादाबादीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

बारहवीं का नूर दिल पे छा गयाआ गए नबी, आ गए नबी

अस्सलामु 'अलैका या मुस्तफ़ा !अस्सलामु 'अलैका या मुस्तफ़ा !

मेरे सरकार आए, झूमोमेरे दिलदार आए, झूमोमेरे सरदार आए, झूमोमेरे ग़म-ख़्वार आए, झूमो

सरकार की आमद ! मरहबा !दिलदार की आमद ! मरहबा !ग़म-ख़्वार की आमद ! मरहबा !मंठार की आमद ! मरहबा !अव्वल की आमद ! मरहबा !आख़िर की आमद ! मरहबा !सरवर की आमद ! मरहबा !दिलबर की आमद ! मरहबा !

आ गए नबी, आ गए नबी

मेरे आक़ा आए हैं, सज गया ज़माना हैमेरे आक़ा आए हैं, सज गया ज़माना है

महकी महकी हैं गलियाँ, रंग क्यूँ सुहाना है ?रहमतों का क्यूँ सर पे आज शामियाना है ?मरहबा का हर लब पर आज क्यूँ तराना है ?

मेरे आक़ा आए हैं, सज गया ज़माना हैमेरे आक़ा आए हैं, सज गया ज़माना है

आमिना के प्यारे का जश्न हम मनाएँगेझंडे भी लगाएँगे, घर को भी सजाएँगेनग़्मा उन की आमद का झूम कर सुनाएँगेजश्न है शह-ए-दीं का सब को ये बताना है

मेरे आक़ा आए हैं, सज गया ज़माना हैमेरे आक़ा आए हैं, सज गया ज़माना है

उन के आने से पहले ज़ुल्म हर-सू होता थाआह ! बेटियाँ प्यारी दफ़्न होती थीं ज़िंदारो रही थी हर बेवा, थे यतीम अफ़्सुर्दामिट गया जो आए वो दौर ज़ालिमाना है

मेरे आक़ा आए हैं, सज गया ज़माना हैमेरे आक़ा आए हैं, सज गया ज़माना है

जश्न है ये उन का जो चाँद के करें टुकड़ेशान वो मिली रब से, पेड़ भी करें सज्देवो जो चाहें, सूरज भी डूब कर पलट आएरब से मर्तबा पाया आप ने यगाना है

मेरे आक़ा आए हैं, सज गया ज़माना हैमेरे आक़ा आए हैं, सज गया ज़माना है

बारहवीं का नूर दिल पे छा गयाआ गए नबी, आ गए नबी

सरकार की आमद ! मरहबा !दिलदार की आमद ! मरहबा !ग़म-ख़्वार की आमद ! मरहबा !मंठार की आमद ! मरहबा !अव्वल की आमद ! मरहबा !आख़िर की आमद ! मरहबा !सरवर की आमद ! मरहबा !दिलबर की आमद ! मरहबा !

आए बज़्म-ए-'आलम में रहमत-ए-ख़ुदा बन करबे-सहारों, मज़लूमों का वो आसरा बन करदर्दमंदों के हक़ में बा'इस-ए-शिफ़ा बन करवो कि जिन को बिन देखे हर कोई दीवाना है

मेरे आक़ा आए हैं, सज गया ज़माना हैमेरे आक़ा आए हैं, सज गया ज़माना है

आमिना की गोदी में आए जब मेरे आक़ाआसमाँ से तारे भी लेने आए थे सदक़ादेख कर के का'बा भी उन को वज्द में आयाज़िक्र उन की आमद का किस-क़दर सुहाना है

मेरे आक़ा आए हैं, सज गया ज़माना हैमेरे आक़ा आए हैं, सज गया ज़माना है

मुस्तफ़ा के सदक़े ही ये जहाँ बना, 'आसिम !ज़िंदगी भी है पाई, दीन-ए-हक़ मिला, 'आसिम !माल क्या है ! आक़ा पर जान भी फ़िदा, 'आसिम !जब तलक है जाँ बाक़ी, जश्न ये मनाना है

मेरे आक़ा आए हैं, सज गया ज़माना हैमेरे आक़ा आए हैं, सज गया ज़माना है

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