नात लिरिक्स

Main To Panj-tan Ka Ghulaam Hun

मैं तो पंज-तन का ग़ुलाम हूँ

नात ख़्वान: अब्दुल हबीब अत्तारीशायर: यूसुफ़ क़मरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मैं तो पंज-तन का ग़ुलाम हूँमैं ग़ुलाम इब्न-ए-ग़ुलाम हूँमैं फ़क़ीर-ए-ख़ैरुल-अनाम हूँमैं तो पंज-तन का ग़ुलाम हूँ

मुझे 'इश्क़ है तो ख़ुदा से हैमुझे 'इश्क़ है तो रसूल सेये करम है सारा बतूल कामेरे मुँह से आए महक सदाजो मैं नाम लूँ तेरा झूम के

मैं तो पंज-तन का ग़ुलाम हूँमैं तो पंज-तन का ग़ुलाम हूँ

मुझे 'इश्क़ सर्व-ओ-समन से हैमुझे 'इश्क़ सारे चमन से हैमुझे 'इश्क़ उन के वतन से हैमुझे 'इश्क़ उन की गली से हैमुझे 'इश्क़ है तो 'अली से हैमुझे 'इश्क़ है तो हसन से हैमुझे 'इश्क़ है तो हुसैन सेमुझे 'इश्क़ शाह-ए-ज़मन से है

मैं तो पंज-तन का ग़ुलाम हूँमैं तो पंज-तन का ग़ुलाम हूँ

हुआ कैसे तन से वो सर जुदाजहाँ 'इश्क़ है वहीं कर्बलामेरी बात उन ही की बात हैमेरे सामने वोही ज़ात हैवही जिन को शेर-ए-ख़ुदा कहेंजिन्हें बाब-ए-सल्ले-'अला कहेंवही जिन को ज़ात-ए-'अली कहेंवही पुख़्ता हैं, मैं तो ख़ाम हूँ

मैं तो पंज-तन का ग़ुलाम हूँमैं तो पंज-तन का ग़ुलाम हूँ

मैं, क़मर ! हूँ शा'इर-ए-बे-नवामेरी हैसियत ही भला है क्यावो हैं बादशाहों के बादशाहमैं हूँ उन के दर का बस इक गदामेरा पंज-तन से है वासितामेरा निस्बतों का है सिलसिलामैं फ़क़ीर-ए-ख़ैरुल-अनाम हूँ

मैं तो पंज-तन का ग़ुलाम हूँमैं तो पंज-तन का ग़ुलाम हूँ

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