नात लिरिक्स

Main Nisar Kyun Na Raza Pe Hun Mujhe Jis Ne Rab Se Mila Diya

मैं निसार क्यूँ न रज़ा पे हूँ मुझे जिस ने रब से मिला दिया

नात ख़्वान: मुहम्मद अश्फ़ाक़ अत्तारी मदनीशायर: मुहम्मद हुसैन मुशाहिद रज़वीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मैं निसार क्यूँ न रज़ा पे हूँ, मुझे जिस ने रब से मिला दियाउसी रब का हम्द-सरा हूँ मैं, कि श'ऊर-ए-फ़िक्र-ए-रज़ा दिया

मैं निसार क्यूँ न रज़ा पे हूँ, मुझे जिस ने रब से मिला दिया

मैं रज़ा रज़ा ही कहा करूँ, मुझे 'इश्क़-ए-शाह-ए-दना दियामुझे भीक लेने के वासिते दर-ए-मुस्तफ़ा का पता दिया

मैं निसार क्यूँ न रज़ा पे हूँ, मुझे जिस ने रब से मिला दिया

तेरे दर से शान सहाबा की मेरे ज़ेहन-ओ-दिल पर अयाँ हुईमुझे अहल-ए-बैत का मर्तबा तेरी फ़िक्र ने ही बता दिया

मैं निसार क्यूँ न रज़ा पे हूँ, मुझे जिस ने रब से मिला दिया

न जमाल-ए-हक़ का श'ऊर था, न था फ़हम-ए-बातिल-ओ-बातिलाँमुझे हक़ से तू ने मिला दिया, मुझे राह-ए-हक़ पे चला दिया

मैं निसार क्यूँ न रज़ा पे हूँ, मुझे जिस ने रब से मिला दिया

तेरे नाम पर मैं फ़िदा हुआ, मेरे लब पे नाम तेरा रहातेरे नाम ने, तेरे 'इश्क़ ने मुझे नेक-नाम बना दिया

मैं निसार क्यूँ न रज़ा पे हूँ, मुझे जिस ने रब से मिला दिया

न था कुछ श'ऊर-ए-सुख़न-वरी, न था कुछ सलीक़ा-ए-ना'त भीतेरी ना'त-गोई ने, ऐ रज़ा ! मुझे ना'त पढ़ना सिखा दिया

मैं निसार क्यूँ न रज़ा पे हूँ, मुझे जिस ने रब से मिला दिया

मैं निसार तेरे कलाम पर, जो है मुनफ़रिद ऐ मेरे रज़ा !सभी कह रहे हैं ये बरमला, तू ने जाम-ए-'इश्क़ पिला दिया

मैं निसार क्यूँ न रज़ा पे हूँ, मुझे जिस ने रब से मिला दिया

ऐ मुशाहिद-ए-रज़वी ! मुझे क्यूँ रज़ा पे ख़ूब न नाज़ होकि उसी ने ज़ौक़-ए-सुख़न दिया और उसी ने शौक़-ए-सना दिया

मैं निसार क्यूँ न रज़ा पे हूँ, मुझे जिस ने रब से मिला दिया

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