नात लिरिक्स

Banaya Mujh Ko Apna Hai Tera Ehsan Hai Murshid

बनाया मुझ को अपना है तेरा एहसान है मुर्शिद

नात ख़्वान: मुहम्मद अश्फ़ाक़ अत्तारी मदनीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

बनाया मुझ को अपना है, तेरा एहसान है मुर्शिद !मिला मुझ को ये रुत्बा है, तेरा एहसान है मुर्शिद !

तेरी निस्बत ने मुझ को कर दिया है क्या से क्या, मुर्शिद !रखा क्या मुझ में वर्ना है, तेरा एहसान है मुर्शिद !

भटकता फिर रहा था दश्त-ए-'इस्याँ में यूँही बेकसदिखाया तू ने रस्ता है, तेरा एहसान है मुर्शिद !

ये फ़ैशन का था शैदाई, यूँही फिरता था नंगे सरये जो सर पर 'अमामा है, तेरा एहसान है मुर्शिद !

ज़बाँ पर गालियाँ, होंटों पे गाने थे कभी जारीये जो लब पर मदीना है, तेरा एहसान है मुर्शिद !

ये निगराँ है, ये हाफ़िज़ है, ये क़ारी, ये मुबल्लिग़ हैसभी पे तेरा साया है, तेरा एहसान है मुर्शिद !

नमाज़ों की हिफ़ाज़त का, 'इबादत का, तिलावत कामिला जो भी ये जज़्बा है, तेरा एहसान है मुर्शिद !

ये मदनी क़ाफ़िलों का, मदनी इन'आमात का तू नेदिया उम्मत को तोहफ़ा है, तेरा एहसान है मुर्शिद !

हया की चादर-ए-ने'मत 'अता कर दी उसे तू नेये करती अब जो पर्दा है, तेरा एहसान है मुर्शिद !

ये हाए क्या मैं करता हूँ, तुझे नाराज़ करता हूँमुझे फिर भी निभाया है, तेरा एहसान है मुर्शिद !

मैं हूँ मँगता तेरा, मुर्शिद ! किसी जानिब मैं क्यूँ देखूँलगा दर पर जो तकिया है, तेरा एहसान है मुर्शिद !

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