नात लिरिक्स

Kya Haseen-o-Bhala In Ka Andaz Hai | Mujh Ko Attar Par Fakhr Hai Naaz Hai

क्या हसीन-ओ-भला इन का अंदाज़ है | मुझ को अत्तार पर फ़ख़्र है नाज़ है

नात ख़्वान: मुहम्मद अश्फ़ाक़ अत्तारी मदनीशायर: मुहम्मद अश्फ़ाक़ अत्तारी मदनीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मेरे अमीर-ए-अहल-ए-सुन्नत !प्यारे अमीर-ए-अहल-ए-सुन्नत !

क्या हसीन-ओ-भला इन का अंदाज़ हैमुझ को 'अत्तार पर फ़ख़्र है नाज़ है

इन के नक़्श-ए-क़दम पर है जो भी चलाउस की दुनिया-ओ-'उक़्बा सर-अफ़राज़ है

क्या हसीन-ओ-भला इन का अंदाज़ हैमुझ को 'अत्तार पर फ़ख़्र है नाज़ है

बार-ए-एहसान मुझ पर भी है आप काफ़ैज़ से आप के मेरी आवाज़ है

क्या हसीन-ओ-भला इन का अंदाज़ हैमुझ को 'अत्तार पर फ़ख़्र है नाज़ है

क्या ही शीरीं-तरीं आप का है सुख़नआप की हर अदा 'ईश्वा-पर्दाज़ है

क्या हसीन-ओ-भला इन का अंदाज़ हैमुझ को 'अत्तार पर फ़ख़्र है नाज़ है

हो के क़ुर्बान हो जाऊँ तुझ में फ़नापर हक़ीक़त में ये मेरा आग़ाज़ है

क्या हसीन-ओ-भला इन का अंदाज़ हैमुझ को 'अत्तार पर फ़ख़्र है नाज़ है

तू तसव्वुफ़ की दुनिया का ताज-ओ-नगींआसमान-ए-विलायत का शहबाज़ है

क्या हसीन-ओ-भला इन का अंदाज़ हैमुझ को 'अत्तार पर फ़ख़्र है नाज़ है

आप के हुक्म पर सर ब तस्लीम ख़मदिल पे फ़रमाँ-रवा आप का साज़ है

क्या हसीन-ओ-भला इन का अंदाज़ हैमुझ को 'अत्तार पर फ़ख़्र है नाज़ है

लोग फ़ानी को कहने लगे सग तेराइस से बढ़ कर भी क्या कोई ए'ज़ाज़ है

क्या हसीन-ओ-भला इन का अंदाज़ हैमुझ को 'अत्तार पर फ़ख़्र है नाज़ है

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