नात लिरिक्स

Mah-e-Ramzan Jalwanuma Ho Gaya

माह-ए-रमज़ान जल्वा-नुमा हो गया

नात ख़्वान: ज़ोहैब अशरफ़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

माह-ए-रमज़ान जल्वा-नुमा हो गयाहर तरफ़ नूर का इक समाँ हो गया

कैफ़ियत दिल की तब्दील होने लगीहुक्म-ए-मौला की ता'मील होने लगीऔर 'इबादत के जज़्बे मचलने लगेरोज़ा-दारों के चेहरे भी खिलने लगेरंग दुनिया का जैसे नया हो गयामाह-ए-रमज़ान जल्वा-नुमा हो गया

माह-ए-रमज़ान जल्वा-नुमा हो गयाहर तरफ़ नूर का इक समाँ हो गया

हर तरफ़ बज़्म-ए-सेहरी-ओ-इफ़्तार हैंहर घड़ी रब की रहमत के आसार हैंनूर है हर तरफ़, छाए अनवार हैंमाह-ए-रमज़ान रहमत का शाहकार हैनूर-ए-ईमाँ से दिल पुर-ज़िया हो गयामाह-ए-रमज़ान जल्वा-नुमा हो गया

माह-ए-रमज़ान जल्वा-नुमा हो गयाहर तरफ़ नूर का इक समाँ हो गया

मरहबा मरहबा माह-ए-रमज़ाँ !मरहबा मरहबा माह-ए-रमज़ाँ !

माह-ए-रमज़ान में है क़ुरआँ का नुज़ूललब से निकली हुई हर दु'आ हो क़ुबूलहै तरावीह की ने'मत का इस में हुसूलहर घड़ी बरकतों के खिले इस में फूलरोज़ा-दारों की ख़ुद रब जज़ा हो गयामाह-ए-रमज़ान जल्वा-नुमा हो गया

माह-ए-रमज़ान जल्वा-नुमा हो गयाहर तरफ़ नूर का इक समाँ हो गया

खुल गए बाब-ए-जन्नत इसी माह मेंग़म-ज़दों को है राहत इसी माह मेंशब-ए-क़द्र की ने'मत इसी माह मेंदिल को मिलती हरारत इसी माह मेंफिर से जारी ये माह-ए-ख़ुदा हो गयामाह-ए-रमज़ान जल्वा-नुमा हो गया

माह-ए-रमज़ान जल्वा-नुमा हो गयाहर तरफ़ नूर का इक समाँ हो गया

मरहबा मरहबा माह-ए-रमज़ाँ !मरहबा मरहबा माह-ए-रमज़ाँ !

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